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पानी में डूबने से खराब हुई धान की फसल, किसानों ने खेतों में छोड़ी

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संभल। पवांसा के कई गांवों के खेतों में धान की फसल बारिश के पानी में अभी भी डूबी हुई है। किसानों ने धान की फसलों को अब खेत में ही छोड़ दिया है। क्योंकि धान की फसल पानी में ही अब जमने लगी है। किसानों का कहना है कि सर्वे के लिए लेखपाल भी नहीं आ रहे हैं। फोन पर लेखपालों से संपर्क नहीं हो रहा है। इससे किसान बेहद परेशान हैं।
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ब्लॉक क्षेत्र में उप जिलाधिकारी रमेश बाबू के आदेश पर खराब हुई धान की फसल का सर्वे चल रहा है। लेखपाल गांव-गांव जाकर बर्बाद हुई फसल का आकलन कर रहे हैं। पवांसा के लेखपाल गांव के कुछ किसानों का सर्वे कर चले गए और फोन स्विच ऑफ कर रखा है। ऐसे में किसान चिंतित है कि धान की फसल का मुआवजा मिलने से न रह जाए। समस्या यही नहीं है जो धान बचे भी हैं, उनकी बिक्री के लिए आवेदन नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में किसान धान को ओने-पौने दामों में बेचने को मजबूर हैं।
गड्ढे की जमीनों में धान की फसल छह बीघा में लगाई थी। बारिश का पानी भर गया और जिसमें अभी फसल डूबी हुई है। अब धान दोबारा से जमने लगे। इसीलिए फसल खेत से उठाना भी सही नहीं है। दाना काला पड़ चुका है। बर्बाद फसल का आकलन कराने के लिए लेखपाल को सुबह से कई बार फोन किया। मगर फोन बंद है।
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सुनील कुमार, किसान, पवांसा
सरकारी क्रय केंद्र पर धान बेचने के लिए आवेदन नहीं हो पा रहा है। लेखपाल फोन नहीं उठा रहे हैं। आवेदन की समस्या को लेकर लेखपाल से मिलने के लिए कई बार तहसील भी गए, लेकिन वहां भी नहीं मिले। ऐसे में धान कैसे बेच पाएंगे।
अचल सिंह राघव, किसान पवांसा
खेत में बारिश का पानी भरे रहने से धान की फसल बर्बाद हो गई। धान काला पड़ गया। दोबारा से फसल उगने लगी है। किसान क्रेडिट कार्ड भी है। इसके बावजूद भी कृषि विभाग के द्वारा सर्वे नहीं कराया गया है।
सोमपाल प्रजापति, किसान धुरैटा
यह बोले जिम्मेदार
ब्लॉक क्षेत्र में कितने किसानों का बीमा है, इसकी जानकारी नहीं है। बर्बाद हुई धान की फसल की शिकायत किसानों के द्वारा लिखित में नहीं की गई है और न ही टोल फ्री नंबर पर शिकायत दर्ज की गई है। जिन किसानों के फसल बीमा और किसान क्रेडिट कार्ड हैं। वह किसान टोल फ्री नंबर और कृषि विभाग को लिखित में शिकायत दर्ज कराएं। तभी फसल का मुआवजा मिल सकेगा।
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देशराज सिंह, एडीओ कृषि, पवांसा
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