शौक बड़ी चीज है..., जिसे पूरा करने में समय और खर्च की हद नहीं देखी जाती। ऐसा ही शौक है फोटोग्राफी का। प्रकृति और वन्यजीवों के फोटो कैमरे में कैद करने का जुनून ऐसा है कि सैकड़ों किलोमीटर दूर तक चले जाते हैं। इंतजार करते हैं उस पल का, जिसे देखने की बेताबी रहती है। ऐसे अनेक फोटोग्राफर सहारनपुर जिले में हैं, जिनमें कोई 20 साल तो कोई 25 साल से जुड़ा है। इन्होंने अनेक ऐसे फोटो खींचे जो चर्चाओं में रहे। सहारनपुर से शिवालिक और उससे आगे के विशाल पहाड़ों की खींची गई फोटो भी बेहद खास रही हैं। विश्व फोटोग्राफी दिवस (19 अगस्त) पर ऐसे ही लोगों के बारे में रिपोर्ट...
रील से डीएसएलआर तक का सफर
जब फोटोग्राफी शुरू की थी तब हॉट शॉट कैमरा आता था, जिसमें रील डालते थे और फिर निगेटिव से फोटो बनवाते थे। अब उसकी जगह डीएसएलआर ने ले ली और उसमें भी अत्याधुनिक लैंस आए गए, जिनके प्रयोग से दूर की तस्वीर भी कैमरे में आसानी से कैद हो जाती है। इस बदलाव ने पेशेवर फोटोग्राफरों के लिए कुछ सहूलियत की तो कारोबार की दृष्टि से कुछ खामियां भी आईं। यही वजह है कि फोटो कलर लैब का कारोबार भी सिमट गया, जबकि पूर्व में शहर में एक नहीं, बल्कि कई फोटो कलर लैब होती थीं।