सहंश्रा ठाकुर मंदिर में विराजमान हैं भगवान श्री विष्णु के तीनों रूप
शाकंभरी (सहारनपुर)। शिवालिक पर्वत श्रंखलाओं के मध्य पांडव काल का विष्णु भगवान का अलौकिक संहश्रा ठाकुर मंदिर भी स्थापित है। इसकी महिमा अपरंपार है। किवदंती है कि महाभारत काल में पांडवों ने यहां पानी के कुएं और श्रीकृष्ण और अर्जुन ने बाण गंगा को प्रकट किया था।
पुराणों में इस प्राचीन मंदिर का उल्लेख मिलता है कि जब पांडवों को वनवास मिला था तो अज्ञातवास के दौरान पांचों पांडव अपनी पहचान छुपाने के दौरान यहां पहुंचे थे और कुछ समय उन्होंने इस मंदिर क्षेत्र में व्यतीत किया था। उन्होंने पीने के पानी के लिए एक छोटे कुएं का निर्माण भी किया था, जिसकी गहराई बेहद कम है, लेकिन इसका पानी पीने से थकान एकदम दूर हो जाती है। मंदिर परिक्षेत्र में सात पानी के कुंड हैं, इनको सूर्य कुंड कहा जाता है। मान्यता है कि इन कुंडों पर सूर्य की प्रथम किरण पड़ने से इनका नाम सूर्य कुंड पड़ा। इन कुंडों में स्नान करने के बाद चर्म रोग भी समाप्त हो जाता है। विशेष बात यह है कि श्री हरि विष्णु के तीनों रुपों श्री विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण की प्रतिमाएं भी इस मंदिर में विराजमान हैं जो बहुत कम स्थान पर ही मिल पाती है।
मंदिर की छत में श्री लक्ष्मी यंत्र का होना भी इस बात का प्रमाण है कि यह मंदिर प्राचीन है। पिछले लगभग एक हजार साल से पास के ही जसमौर गांव का महंत परिवार इस मंदिर की देखरेख कर रहा है। उनके पुरखों की समाधियां यहां पर स्थित है। मंदिर के महंत परिवार का कहना है कि इस मंदिर का बाहर से स्वरूप पूर्व में श्री केदारनाथ मंदिर जैसा ही था। मंदिर में रहने वाले पंडितों का कहना है कि कभी-कभी एक अलौकिक जोत (ज्वाला) भी देखी गई है जो विष्णु कुंड से उठकर आसमान में जाकर विलुप्त होती भी देखी गई है। इसके अलावा मंदिर परिसर में भगवान शंकर की उकेरी हुई तस्वीर वाला शिवलिंग भी पांडव कालीन समय का ही स्थापित है। उसके साथ में नंदीश्वर भी विराजमान है। एक सिद्ध गुफा भी यहां पर है। मंदिर से नीचे की तरफ बाणगंगा है, इसे अर्जुन एवं श्रीकृष्ण ने बनाया। कितनी ही गर्मी का मौसम हो इसका पानी नहीं सूखता है और यह जल गंगा की तरह से पवित्र है।
यहां तक ऐसे पहुंचे
सिद्ध पीठ शाकंभरी देवी से पहले ही भूरादेव मंदिर के पास से मोहंड को जाने वाले रास्ते पर पांच किमी नदी के साथ साथ जंगल में चलना पड़ता है। इसके बाद वन गुर्जरों के डेरों के पास से चढ़ाई शुरू होती है। करीब एक किमी पहाड़ चढ़ने के बाद मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।
सहंश्रा ठाकुर मंदिर- फोटो : SAHARANPUR
मंदिर के गर्भ गृह में बना श्रीयंत्र- फोटो : SAHARANPUR
श्री विष्णु के तीनों रूपों की मूर्तियां।- फोटो : SAHARANPUR
मंदिर परिसर में बना सूर्यकुंड- फोटो : SAHARANPUR