विद्यालयों में नामांकन को लेकर शिक्षकों की कसरत तेज
सहारनपुर। परिषदीय विद्यालयों में भौतिक रूप से शिक्षण कार्य शुरू हो चुका है। कक्षा छह से आठ के विद्यार्थियों की पढ़ाई चल रही है। एक सितंबर से कक्षा एक से पांच के विद्यार्थियों को विद्यालय बुलाया जाएगा। इसके साथ ही नामांकन की कसरत शुरू हो चुकी है।
जनपद में 1438 परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें कक्षा एक से आठ तक के विद्यार्थियों की कुल संख्या 1,89,730 है। बेसिक शिक्षा परिषद की मंशा है कि विद्यालयों में छात्र संख्या कम ना हो। इसके लिए विभाग की ओर से शिक्षकों को नामांकन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। जिसके लिए शिक्षकों ने भागदौड़ शुरू कर दी है। खास बात यह है कि नामांकन 30 सितंबर से पहले होने हैं। 30 सितंबर तक नामांकित बच्चों को ही मुफ्त यूनिफॉर्म, स्कूल बैग, जूते, जुराब आदि का लाभ मिल पाता है। हालांकि शिक्षा का अधिकार कानून के तहत बच्चा किसी भी माह में विद्यालय पहुंचकर दाखिला ले सकता है।
टीसी की बाध्यता बनी बाधा
जनपद के कुछ ब्लॉक में खंड शिक्षा अधिकारियों ने मासिक बैठक में शिक्षकों को छात्र पंजीकरण के लिए टीसी की अनिवार्यता रखी है, जबकि शिक्षा का अधिकार कानून के तहत ऐसी बाध्यता नहीं है। कोरोना काल की फीस नहीं चुकाने की वजह से मान्यता प्राप्त विद्यालयों के अनेक बच्चे सरकारी विद्यालयों की ओर भाग रहे हैं। मगर टीसी की बाध्यता उन्हें दाखिले से रोक रही है। यदि वह टीसी लाते हैं तो उन्हें पहले फीस भरनी होगी और यदि नहीं लाते हैं तो दाखिला नहीं हो होगा।
टीसी की कोई बाध्यता नहीं : बीएसए
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अंबरीश कुमार का कहना है कि परिषदीय विद्यालयों में दाखिले के लिए टीसी की बाध्यता नहीं है। जिन कक्षाओं में जरूरत होती है, यदि उनमें भी किसी छात्र के पास टीसी ना हो तो अभिभावक से शपथपत्र लेकर भी दाखिला दिया जाता है। ऐसे में शिक्षक केवल नामांकन बढ़ाने पर जोर दें। यदि कोई खंड शिक्षा अधिकारी टीसी की बाध्यता रख रहा है, तो वह गलत है।