सरकारी नलकूप से सिंचाई को पानी लेने के विवाद में हुई किसान की हत्या के मामले में तीन दोषियों को अपर सत्र न्यायाधीश (कक्ष संख्या-एक) आराधना रानी ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही प्रत्येक पर 35-35 हजार रुपये अर्थदंड लगाया है।
यह वारदात रामपुर मनिहारान कोतवाली क्षेत्र के गांव बुड्ढा खेड़ा गुर्जर में 18 मई 2017 में हुई थी। किसान सुभाष निवासी बुड्ढा खेड़ा गुर्जर सिंचाई के लिए खेत पर गया था। जब सुभाष का पुत्र राजेंद्र अपने पिता के लिए खाना लेकर खेत पर पहुंचा तो सुभाष वहां नहीं मिला, बल्कि उनके जूते और लाठी पड़ी थी। राजेंद्र ने पिता सुभाष की गुमशुदगी थाना रामपुर मनिहारान पर दर्ज कराई थी। इसके बाद 21 मई को हिंडन नदी में बोरे में सर कटी लाश बरामद हुई। इसकी पहचान सुभाष के रूप में की गई। मामले में गांव के एक व्यक्ति ने गवाही देकर बताया था कि जब सुभाष अपने खेत में पानी देने जा रहा था तो, गांव के ही झबल सिंह, उसका भाई जोध सिंह और बिजेंद्र पुत्र राम कुमार पीछे पीछे जा रहे थे। इन लोगों का सुभाष के साथ पानी को लेकर पहले भी झगड़ा हुआ था।
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शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) सोनवीर सिंह ने बताया पुलिस ने विवेचना उपरांत झबल सिंह, जोध सिंह और बिजेंद्र के खिलाफ आरोपपत्र अदालत में पेश किया था। अपर सत्र न्यायाधीश (कक्ष संख्या एक) आराधना रानी के न्यायालय में इसकी सुनवाई हुई। न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलील सुनने और पत्रावली का अवलोकन पर तीनों को दोषी पाया। इसके चलते तीनों दोषियों को आजीवन कारावास और 35-35 हजार रुपये अर्थदंड लगाया है।
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नहीं मिला किसान सुभाष का सिर
बुड्ढा खेड़ा गुर्जर निवासी सुभाष की हत्या कर सिर को धड़ से अलग कर दिया था। बोरे में सुभाष का सिर्फ धड़ ही मिला था, सिर की बरामदगी नहीं हो पाई थी। कपड़ों से उसकी पहचान सुभाष के रूप में की गई थी।