सहारनपुर। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में रांघड़ो के विद्रोह ने अंग्रेजों के दिलों में भय पैदा कर दिया था। रांघड़ों के साथ ही गुर्जर, राजपूतों ने भी अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए थे। तब बुड्ढाखेड़ा क्रांतिकारियों की छावनी बन चुका था, जिसे बाद में अंग्रेजों ने जला दिया था।
1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में सहारनपुर जिले का इतिहास अलग ही रहा है। यहां के क्रांतिकारियों ने अंग्रेज हुकूमत को ललकारने के साथ ही हमले तक किए। इसी कड़ी में यमुना के खादर में रांघड़ों ने जब विद्रोह किया तो अंग्रेज अफसर भयभीत हो गए थे और इसी समय बुड्ढाखेड़ा के फत्तन गुर्जर ने विद्रोह का बिगुल बजाते हुए स्वयं को गुर्जरों का राजा घोषित कर दिया था। दूसरी तरफ अंग्रेजों द्वारा उसको पकड़ने पर 200 रुपये इनाम की घोषणा कर दी थी। इसी दौरान अंग्रेज अफसरों ने गोरखा सैनिकों को साथ लेकर गंगोह की तरफ कूच किया और बुड्ढाखेड़ा पर आक्रमण कर दिया था। यह गांव क्रांतिकारियों की बड़ी छावनी था। अंग्रेज सैनिकों से क्रांतिकारियों का कड़ा मुकाबला हुआ, जिसमें क्रांतिकारियों को हार मिली थी। इसके बाद अंग्रेज सैनिकों ने बुड्ढाखेड़ा में आग लगाई और एक किला भी नष्ट कर दिया था।
मौलाना रशीद अहमद कर रहे थे नेतृत्व
गंगोह के आसपास क्षेत्र में भी क्रांतिकारी बड़ी संख्या में सक्रिय हो चुके थे। गांव कुंडा कला में रांघड़ों और हिंदू राजपूतों का जमावड़ा था। गंगोह के आसपास के क्षेत्र में क्रांतिकारियों का नेतृत्व मौलाना रशीद अहमद गंगोही कर रहे थे। मौलाना स्वयं भी हथियार लेकर जलालाबाद तक लड़ते हुए पहुंचे थे। कुंडा कला में हिंदू और मुसलमान राजपूतों ने वीरता का प्रदर्शन किया। वहीं, अंग्रेज अफसरों ने सैनिकों के साथ जब इस गांव पर आक्रमण किया तो रास्ते में ही क्रांतिकारियों से टकराव हुआ था। इस युद्ध में 150 राजपूत वीरगति को प्राप्त हुए थे। इसके बाद अंग्रेज सैनिकों ने गांव कुंडा कला को भी जला दिया था। इस तरह अंग्रेजों ने गंगोह और लखनौती क्षेत्र में क्रांति के दमन की कोशिश की थी।