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मजदूर से भी कम मिला पारिश्रमिक, कक्ष निरीक्षक नाराज

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डा अनिल कुमार बावरे - फोटो : SAHARANPUR
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मजदूर से भी कम मिला पारिश्रमिक, कक्ष निरीक्षक नाराज
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सहारनपुर। अधीनस्थ चयन सेवा आयोग उत्तर प्रदेश द्वारा 24 अगस्त को कराई गई प्रारंभिक अर्हता परीक्षा में ड्यूटी करने वाले सरकारी कर्मचारियों को अप्रशिक्षित श्रमिक से भी कम पारिश्रमिक मिला है, साथ ही अलग-अलग केंद्रों पर अलग-अलग पारिश्रमिक देने की बात सामने आई है। इसे लेकर केंद्र व्यवस्थापकों से लेकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों तक में नाराजगी है। उन्होंने इसे उत्पीड़न बताते हुए शासन में शिकायत करने का निर्णय लिया है।
प्रारंभिक अर्हता परीक्षा के लिए जनपद में 21 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। सभी केंद्र शहरी क्षेत्र में थे। इन केंद्रों पर परीक्षा के लिए 9990 अभ्यर्थी पंजीकृत थे। परीक्षा के बाद कक्ष निरीक्षकों को किसी केंद्र पर 350-350 रुपये तो किसी केंद्र पर 400-400 रुपये दिए गए हैं। वहीं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के हिस्से में तो 100 से 150 रुपये ही आए हैं, वह भी दो-दो दिन ड्यूटी करने के बाद। कक्ष निरीक्षकों की बात करें तो कुछ ही दिन पहले हुई टीजीटी और पीजीटी की परीक्षा में कक्ष निरीक्षकों को एक दिन की ड्यूटी का 1200 रुपये तक भुगतान किया गया है। प्रारंभिक अर्हता परीक्षा में दो पालियों में ड्यूटी के एवज में 350 और 400 रुपये पारिश्रमिक दिए जाने को कक्ष निरीक्षक उत्पीड़न बता रहे हैं। एसएएम इंटर कॉलेज में प्रत्येक कक्ष निरीक्षक को 350 रुपये मिले हैं। यानी प्रत्येक पाली का 175 रुपये दिया गया है। उधर, एसडी इंटर कॉलेज में 400-400 रुपये दिए गए हैं।
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कक्ष निरीक्षकों की बात
परीक्षा में कक्ष निरीक्षक के रूप में ड्यूटी करने वाले विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष संगठन मंत्री राजकुमार चौधरी ने इसे शिक्षकों का अपमान और उत्पीड़न बताया है। इस संबंध में शासन को पत्र लिखेंगे। भविष्य में निजी कंपनी के ठेके वाली परीक्षा में शिक्षक ड्यूटी नहीं करेंगे।
शिक्षक नेता डॉ. अनिल बावरे का कहना है कि बीते दिनों टीजीटी और पीजीटी की परीक्षा में कक्ष निरीक्षकों को सम्मानजनक मानदेय मिला, लेकिन प्रारंभिक अर्हता परीक्षा में अप्रशिक्षित मजदूर से भी कम मानदेय मिला है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को दो दिन की ड्यूटी करने के बाद 150 रुपये मिले हैं।
एचएवी इंटर कॉलेज में ड्यूटी करने वाले कक्ष निरीक्षक शिव कुमार यादव का कहना है कि यदि सरकार किसी परीक्षा को कराती है तो शिक्षक फ्री में ड्यूटी करने को तैयार हैं, मगर निजी कंपनी के हाथों में जिम्मेदारी देकर सरकारी सेवकों का उत्पीड़न और अपमान किया जाना ठीक नहीं है।
बोले केंद्र व्यवस्थापक
एसडी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. धर्मेद्र कुमार शर्मा ने बताया कि उनके यहां 960 अभ्यर्थियों की परीक्षा थी। कंपनी ने उन्हें 24,000 रुपये दिए। कुल 13 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों ने दो दिन काम किया, जिसके बाद उनके हिस्से में 150-150 रुपये आए हैं। कक्ष निरीक्षकों को 400-400 रुपये दिए गए हैं। परीक्षा पर हुए अन्य खर्च कॉलेज को अपने आप वहन करने पड़े हैं।
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कंपनी का पक्ष
कंपनी ने 25 रुपये प्रति अभ्यर्थी भेजे : सिटी हेड
प्रारंभिक अर्हता परीक्षा कराने का जिम्मा एडुटेस्ट सोल्यूशन प्राइवेट कंपनी पर था। कंपनी के सिटी हेड मोहित वर्मा ने बताया कि कंपनी ने ऊपर से ही प्रत्येक अभ्यर्थी 25 रुपये हिसाब से खर्च भेजा था। उसी के अनुरूप केंद्रों को पैसा मुहैया कराया है।

राजकुमार चौधरी- फोटो : SAHARANPUR

शिव कुमार यादव- फोटो : SAHARANPUR

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