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अचानक बढी ठंड से मशरूम में गलन शुरू

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सहारनपुर। अचानक बढ़ी ठंड मशरूम उत्पादकों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। सर्दी के चलते मशरूम में गलन की समस्या पैदा हो गई है। जनपद की 245 से अधिक मशरूम इकाइयों पर असर पड़ रहा है।
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जनपद के किसानों का रूझान मशरूम की खेती की ओर हो रहा है। इसका बड़ा कारण कम लागत और बढ़िया आमदनी है। इसके चलते जनपद में मशरूम उत्पादकों की संख्या बढ़ रही है। अब सीजन सफेद बटन मशरूम का है। इसके लिए तापमान 15 से 18 डिग्री सेल्सियस और आर्द्रता 85 से 90 प्रतिशत होनी चाहिए। अचानक गिरे तापमान से मशरूम में गलन की समस्या आने लगी है। कम तापमान में फफूंदी की समस्या भी पैदा हो गई है। गलन की समस्या पर समय से नियंत्रण नहीं पाया गया तो इसका असर मशरूम उत्पादन पर पड़ेगा।
फसल बचाने के लिए ये उपाय करें
मशरूम विशेषज्ञ और केवीके प्रभारी डॉ. आईके कुशवाहा का कहना है कि तापमान में आई अचानक गिरावट से मशरूम में गलन की समस्या आई है। इससे बचाव के लिए किसानों को मशरूम उत्पादन इकाई का तापमान बढ़ाना चाहिए। इसके लिए मशरूम की इकाई को दिन में कम से कम पांच घंटे तक खोल कर रखें। इसके साथ ही मशरूम की इकाई में बिजली के कई बल्बों को जलाकर रखें। इकाई में ताजे पानी का छिडकाव करें और गल रहे मशरूम के अवशेषों को निकाल दें। इससे गलन की समस्या पर अंकुश लगाया जा सकता है।
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300 टन से अधिक होता है मशरूम का उत्पादन
जनपद की करीब 245 इकाइयों में वर्ष में 300 टन से अधिक मशरूम का उत्पादन होता है। जिसे स्थानीय बाजार के साथ दिल्ली, चंड़ीगढ़, देहरादूून समेत महानगरों में सप्लाई किया जाता है। अब जनपद में मशरूम की सबसे मंहगी प्रजाति कीड़ा-जड़ी का उत्पादन शुरू हो गया है। जिले में पूरे वर्ष मशरूम का उत्पादन होता है। अक्तूबर से मार्च तक सफेद बटन की खेती होती है। फरवरी से अप्रैल तक ढिंगरी मशरूम और अगस्त से अक्तूबर महीने तक मिल्की मशरूम की खेती की जाती है।
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