सहारनपुर। आज विश्व मच्छर दिवस है। मच्छर मानव जीवन के लिए खतरा भी है। ये डेंगू, मलेरिया, जीका वायरस, चिकनगुनिया जैसी गंभीर बीमारियों का जनक है। ये बीमारियां मनुष्य की जान ले सकती हैं। अच्छी बात यह है कि बीते 20 माह से जनपद में डेंगू और मलेरिया का कोई मामला सामने नहीं आया है। इससे पहले हर साल मच्छरजनित रोगों की वजह से जिले में कई लोगों की मौत होती रही हैं।
वर्ष 2019 में मच्छरों के कारण जनपद में डेंगू और मलेरिया का प्रकोप रहा। डेंगू से जिले भर में 200 से अधिक मौत हुई थीं। हालांकि चिकित्सा विभाग डेंगू को मानने से इनकार करता रहा था। बाद में चिकित्सा विभाग ने भी डेंगू के करीब 212 मामले आने की पुष्टि की थी, लेकिन मौत पर सहमत नहीं हुआ था। 2019 के बाद जनपद में डेंगू का कोई मामला सामने नहीं आया है। इस वर्ष भी जून तक डेंगू के लक्षण किसी मरीज में नहीं देखे गए थे। जुलाई से डेंगू के लक्षण वाले मरीज आना शुरू हुए हैं। जिनकी जांच एसबीडी जिला अस्पताल की पैथोलॉजी लैब में की जा रही है। हालांकि अभी तक किसी भी मरीज में डेंगू की पुष्टि नहीं हो सकी है। डेंगू और मलेरिया नहीं फैलने की प्रमुख वजह कोरोना को माना जा रहा है। कोरोना से बचाव को लेकर लोग सफाई के प्रति जागरूक हुए हैं। साथ ही नगर निकायों में सैनिटाइजेशन, एंटी लार्वा, चूना और मैलाथियान का अत्यधिक छिड़काव तथा फॉगिंग कराई जा रही है।
निगम स्तर से तैयारी
नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. कुनाल जैन ने बताया कि सफाई अभियान 12 महीने जारी रहता है। वहीं, मच्छरों के खात्मे के लिए एक से 31 जुलाई तक संचारी रोग नियंत्रण अभियान नगर निगम द्वारा चलाया गया है। जिसमें रोस्टर के हिसाब से प्रत्येक वार्ड में एंटी लार्वा का छिड़काव और फॉगिंग आदि कराई गई हैं। अब बृहस्पतिवार से मच्छरों के खिलाफ युद्ध स्तर पर अभियान शुरू किया गया है। जिसमें सभी वार्डों को कवर किया जा रहा है।
तीन तरह से हो रहा मच्छरों पर वार
जिला मलेरिया अधिकारी शिवांका गौड़ ने बताया कि मच्छर जनित रोगों पर नियंत्रण के लिए संचारी रोग नियंत्रण अभियान चलाया जा चुका है। मच्छरों पर हम तीन तरह से वार करते हैं। पहला एंटी लार्वा का छिड़काव, दूसरा फॉगिंग और तीसरा बीडीटी का स्प्रे, जो घरों में किया जाता है। ब्लॉक स्तर के साथ ही नगर में टीमें बनाई गई हैं। ये सरकारी कार्यालयों में कूलर, एसी, गमलों और छत पर रखे खाली डिब्बों की जांच कर रही हैं। लार्वा मिलने पर जुर्माना लगाने का प्रावधान है। अब बजट नहीं आता है, बल्कि सरकार सीधे कीटनाशक और सामान भेजती है।