सहारनपुर। बिजली चोरी रोकने के लिए विद्युत निगम नई कवायद कर रहा है। पोर्टल पर डाटा अपलोड करने सहित काफी कार्य हो चुका है। इसे बीट व्यवस्था के तहत लागू किया जा रहा है। जिसमें प्रत्येक ट्रांसफार्मर पर रीडिंग और बिलिंग की व्यवस्था बीट के रूप में होगी। ट्रांसफार्मर की रीडिंग लेने के बाद उपभोक्ताओं के मीटर की रीडिंग होगी। अभी यह व्यवस्था शहरी क्षेत्र में लागू हुई है, जिसके बाद देहात में भी होगी।
इसके लिए मैपिंग का कार्य हो चुका है, उसमें ट्रांसफार्मर, खंभे और उनसे जुड़े उपभोक्ताओं का पूरा ब्यौरा तैयार किया गया है। नई व्यवस्था में जब एक ट्रांसफार्मर पर रीडिंग का कार्य पूरा होगा, तभी दूसरे ट्रांसफार्मर से जुड़े उपभोक्ताओं के यहां मीटर रीडिंग होगी। इस प्रयोग को लेकर विद्युत निगम के अधिकारियों का मानना है कि अलग अलग ट्रांसफार्मर से जुड़े उपभोक्ताओं का बिजली खर्च स्पष्ट हो जाएगा, जिससे बिजली चोरी पकड़ने में आसानी रहेगी। गौरतलब है कि पूर्व में मीटर रीडर अपने निर्धारित क्षेत्र में घूमकर रीडिंग लेते थे, लेकिन उसमें ट्रांसफार्मर वाइज रीडिंग लेने की व्यवस्था नहीं थी।
नॉन ट्रेसेबल उपभोक्ताओं की होगी पहचान
जब मीटर रीडर अपने बीट के मुताबिक ही बिलिंग करेंगे, सभी कनेक्शनों पर बिल बनाने के बाद पोर्टल पर दर्ज डाटा से मिलान होगा, जिसमें पता चलेगा कि कितने उपभोक्ता नॉन ट्रेसेबल उपभोक्ता हैं। चूंकि नगरीय क्षेत्र में ही करीब 10 हजार नॉन ट्रेसेबल उपभोक्ता हैं। बिलिंग के दौरान जिन उपभोक्ताओं को डेटा पोर्टल पर नहीं मिलेगा, उसे नॉन ट्रेसेबल श्रेणी में माना जाएगा।
नगरीय क्षेत्र की स्थिति
उपभोक्ता - 1.30 लाख
बिजलीघर - 13
नॉन ट्रेसेबल उपभोक्ता - करीब 10 हजार
ट्रांसफार्मर -1238
वर्जन
बिलिंग की नई व्यवस्था के मुताबिक काफी कार्य हो चुका है और बिलिंग कार्य मीटर रीडरों द्वारा कराया जा रहा है। इस व्यवस्था से बिजली चोरी पकड़ने में मदद मिलेगी। जिस ट्रांसफार्मर पर लाइनलॉस अधिक होगा, उसका भी पता चलेगा। - पंकज कुमार, अधिशासी अभियंता, विद्युत निगम