फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोरोना के खतरे के सामने सुई का डर कुछ भी नहीं

विज्ञापन
विज्ञापन
सहारनपुर। कोरोना से बचाव के लिए टीका लगवाने में किशोरियां पीछे नहीं हैं। 15 से 17 आयु वर्ग के किशोरों का टीकाकरण तीन जनवरी 2022 से चल रहा है। जिनमें किशोरों के साथ ही किशोरियां भी बराबर टीका लगवाने पहुंच रही हैं। कोविड टीकाकरण में उनका कोरोना होने का डर भी छूमंतर हो गया।
विज्ञापन

15 से 17 और 12 से 14 आयु वर्ग में 95 फीसदी से अधिक छात्र और छात्राएं शामिल हैं। टीकाकरण के लिए स्वास्थ्य विभाग ने विद्यालयों में शिविर लगाकर किशोरों को लाभांवित करने का प्रयास किया है। जिले भर में 15 से 17 आयु वर्ग के किशोर और किशोरियों की संख्या 2 लाख 43 हजार 117 है। जिनमें से 1 एक 99 हजार 890 किशोर-किशोरियां टीका लगवा चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग के पास किशोर-किशोरियों की अलग डाटा नहीं है, लेकिन स्कूलों के आंकड़ों के अनुसार उनके यहां की लगभग 95 फीसदी किशोरों को टीका लग चुका है, जिनमें किशोरियां भी पीछे नहीं हैं। आशा मॉडर्न स्कूल में टीका लगवा चुके करीब 1500 विद्यार्थियों में करीब 60 फीसदी लड़कियां हैं। इसी तरह पाइनवुड पब्लिक स्कूल में भी शत-प्रतिशत टीकाकरण हो चुका है। जिनमें लड़कियों की संख्या करीब 50 फीसदी है।
सुई की चुभन से बड़ा है कोरोना का खतरा
गोविंद नगर निवासी प्रियांशी की उम्र 16 साल है। प्रियांशी आशा मॉडर्न स्कूल की छात्रा है। उन्होंने बताया कि कोविड टीकाकरण राष्ट्रीय अभियान है। प्रियांशी ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर में उन्होंने हालात देखे हैं। कम से कम कोरोना के खतरे से तो अधिक बड़ी नहीं है सुई की चुभन। इसीलिए उसने टीका लगवाया है।
विज्ञापन

सभी लगवा रहे थे इसलिए मैंने भी लगवा लिया
पठानपुरा निवासी चंचल भंडारी सोफिया स्कूल की छात्रा हैं। चंचल की उम्र 15 वर्ष है। चंचल ने बताया कि कोविड टीका तो सभी को लगना है। स्कूल की सभी सहेलियों ने टीका लगवाया है। ऐेसे में वह पीछे कैसे रहती। उसने बताया कि उसे सुई से डर लगता था, लेकिन माता और पिता दोनों ने टीका लगवाने के लिए प्रेरित किया।
कोविड टीकाकरण लगवा चुके लड़के और लड़कियों की अलग-अलग संख्या हमारे पास नहीं है, लेकिन कोविड टीकाकरण में सहारनपुर अच्छी स्थिति में है। उसकी सबसे बड़ी वजह पुरुषों के साथ ही महिलाओं तथा किशोरों के साथ ही किशोरियों का इसमें बढ़ चढ़कर हिस्सा लेना है। मैं समझता हूं कि टीकाकरण में लड़कियां कहीं भी पीछे नहीं हैं। मैंने स्वयं स्कूलों में टीकाकरण के लिए लगी कतारों में लड़कियों को लगे देखा है।-डॉ. सुनील वर्मा, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें