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सात आरोपियों का जमानत प्रार्थना कोर्ट ने किया निरस्त

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-- भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट से छेड़छाड़ कर बनाए थे मतदाता पहचान पत्र
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संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट से छेड़छाड़ कर मतदाता पहचान पत्र बनाने वाले सात आरोपियों के कोर्ट ने जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया है। इस मामले में साइबर थाने में दस आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
जिला शासकीय अधिवक्ता राजीव गुप्ता ने बताया कि पांच माह पूर्व मुख्य चुनाव अधिकारी अजय कुमार शुक्ला ने एसएसपी को पत्र भेजकर जानकारी दी थी कि सहारनपुर में भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट में सेंधमारी कर मतदाता पहचान पत्र बनाए जा रहे हैं। पुलिस ने 11 अगस्त को कोतवाली नकुड़ क्षेत्र से गांव मच्छरहेड़ी निवासी विपुल सैनी को पकड़ा था। जांच में विपुल के अलावा दस आरोपियों के नाम सामने आए, जिनके खिलाफ साइबर थाने में रिपोर्ट दर्ज कर आरोपियों को जेल भेजा गया। विपुल सैनी ने पुलिस को बताया था कि भारत निर्वाचन आयोग कार्यालय में संविदा पर कार्य कर चुके दो लोगों ने उसे वेबसाइट पासवर्ड दिया था, जिसके जरिए वह मतदाता पहचान पत्र बनवा रहा था। इस मामले में जिला जज अश्वनी कुमार त्रिपाठी की न्यायालय में आरोपी आशीष जैन, आदित्य खत्री, नितिन निवासी दिल्ली, संजीव मेहता, दीपक मेहता निवासी राजस्थान, हरिशंकर त्रिपाठी निवासी मेरठ ने जमानत प्रार्थना पत्र लगवाया था। मामले की सुनवाई के बाद जिला जज ने आरोपियों के जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिए।
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मिले थे 60 लाख, बड़ी संख्या में बनाए थे मतदाता पहचान पत्र
साइबर थाना पुलिस ने मामले की जांच की थी, तब विपुल सैनी के खाते से 60 लाख रुपये मिले थे। शासन के निर्देशानुसार जांच एसटीएफ को सौंप दी गई थी। आरोपी विपुल 15 हजार से अधिक मतदाता पहचान पत्र बना चुका था।
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