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भैरव की कृपा से होता है नकारात्मक शक्तियों का अंत

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पूर्ण आहुति देते सहजानंद जी महाराज - फोटो : SAHARANPUR
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शाकंभरी (सहारनपुर)। सिद्ध पीठ शाकंभरी देवी स्थित शंकराचार्य आश्रम के प्रभारी एवं भारतीय संत संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष भैरवतंत्राचार्य सहजानंद ब्रह्मचारी ने कहा काल भैरव भगवान शिव का रौद्र रुप है।
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काल भैरव अष्टमी के बारे में बताते हुए सहजानंद ब्रहमचारी ने कहा शास्त्रों में भी वर्णित है कि मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को काल भैरव प्रकट हुए थे, इसलिए इसे काल भैरव अष्टमी भी कहा जाता है। जो व्यक्ति काल भैरव की पूजा-अर्चना करते हैं, उनके पिछले जन्म और वर्तमान जन्म के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। मृत्यु के बाद काल भैरव के भक्तों को भगवान शिव के पास स्थान मिलता है। उन्होंने बताया भैरव का अर्थ है, भय का भक्षक और जग का रक्षक। भैरव कृपा हो जाए तो जीवन में आने वाली सभी नकारात्मक शक्तियों का अंत हो जाता है। भूत बाधा हो या ग्रह बाधा, शत्रु भय हो या रोग बाधा, सभी को दूर कर भैरव कृपा प्रदान करते हैं। काल भैरव भगवान शिव का प्रबल और प्रचंड स्वरूप है। हिंदू देवताओं में काल भैरव का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है, इन्हें काशी का कोतवाल भी कहा जाता है।
काल भैरव के मंदिर जाकर उन्हें मदिरा, उड़द, दूध, दही, फूल आदि चढ़ाकर भी खुश किया जा सकता है. ऐसा करने से किसी भी ऊपरी बाधा से भी छुटकारा मिल सकता है। हिंदू धर्म में काल भैरव के आठ रूप बताए हैं, इनमें असितांग भैरव, चंड भैरव, रूरू भैरव, क्रोध भैरव, उन्मत्त भैरव, कपाल भैरव, भीषण भैरव, संहार भैरव शामिल हैं। काल भैरव के पूजन दर्शन से कष्टों से निजात मिलता है।
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अष्ट भैरव होमात्मक यज्ञ का समापन
शाकंभरी। शंकराचार्य आश्रम में काल भैरव अष्टमी हर्षोल्लास से मनाई। विगत 20 नवंबर से चल रहे सात दिवसीय अष्ट भैरव होमात्मक यज्ञ का शनिवार को विधिवत पूजा अर्चना के साथ समापन हो गया। इस अवसर विहिप के पूर्व विधायक सुरेंद्र कपिल, पूर्व प्रधान राज कुमार शर्मा, ठा सूर्यकांत राणा, राजू शर्मा, पंडित चर्तुभजाचार्य, रजत शर्मा, अनिल शर्मा आदि उपस्थित रहे। यज्ञ आचार्य कपिल भारद्वाज की अध्यक्षता में हुआ।
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