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शहर के स्वरूप के साथ-साथ बदली लोगों की जीवन पद्धति

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देहरादून रोड पर बना ट्रांसपोर्ट नगर - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। शहर में बीते 20 साल में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पुराने शहर के कई क्षेत्र ऐसे हैं जो आज भी वैसे ही हैं, जैसे पहले थे, लेकिन ओवरऑल विकास की बात करें तो शहर का स्वरूप बदला है, जिसमें बुनियादी जरूरतों जैसे शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं बढ़ीं और बेहतर हुई हैं। नगर निगम ने एक ओर जहां शहर की सड़कों के चौड़ीकरण और सुंदरीकरण, पार्कों के सुंदरीकरण पर कुछ काम किया है तो विकास प्राधिकरण ने टीपी नगर की स्थापना कर ट्रांसपोर्टर्स को शहर से बाहर बसाने का काम किया है। इसके अलावा विकास के भी कई आयाम शहर ने छुए हैं। पेश है रिपोर्ट...
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शिक्षा के क्षेत्र में हुए कार्य
बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा की बात करें तो काफी बदलाव और सुुधार आया है। 20 साल पहले शहर में सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड के स्कूलों की संख्या करीब 21 थी, जो अब 60 से अधिक है। यूपी बोर्ड के कई राजकीय और मान्यता प्राप्त विद्यालय खुले हैं, साथ ही तीन नर्सिंग कॉलेज और निजी महाविद्यालय भी शहर में शुरू हुए हैं।
निजी अस्पतालों की आई बाढ़
शहर में 20 साल पहले करीब 55 निजी अस्पताल और क्लीनिक थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 150 से अधिक हो गई है। दिल्ली रोड, अंबाला रोड और देहरादून रोड पर कई निजी अस्पताल खुले हैं, जिनमें आधुनिक चिकित्सा पद्घति मौजूद है।
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होटल एवं रेस्टोरेंट
वर्तमान में शहरी क्षेत्र में होटल और रेस्टोरेंट की संख्या करीब 27 है, जो अब से 20 वर्ष पहले तक सात थी। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि लोग होटल और रेस्टोरेंट में जाने लगे हैं। जरूरत की वजह से ही इनकी संख्या में वृद्धि आई है।
बैंक्वेट हॉल की संस्कृति बढ़ी
शहर में 20 साल पहले मात्र नौ बैंक्वेट हॉल थे, जिनकी संख्या अब 32 पर पहुंच गई है। यह बैंक्वेट हॉल हाईवे के साथ ही शहरी क्षेत्र में भी तैयार हुए हैं। बैंक्वेट हॉलों की संख्या बढ़ना बताता है कि शहर के लोगों की जीवन पद्धति में बदलाव आया है। अब लोग घरों और गली मोहल्लों की बजाय बैंक्वेट हॉल और होटलों में शादी करने लगे हैं।
नहीं बदले पुराने शहर और 32 गांवों के हालात
शहर को नगर पालिका परिषद से नगर निगम बने 11 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन शहर के पुराने क्षेत्रों में आज भी हालत 20 साल पुराने जैसे ही हैं। पुराने शहर का बड़ा हिस्सा ऐसा है, जहां आज तक सीवर लाइन नहीं है। स्मार्ट सिटी योजना के तहत चिह्नित किए गए एबीडी (एरिया बेस्ड डेवलेपमेंट) क्षेत्र आज भी विकास से कोसों दूर है। पुराना कलसिया रोड क्षेत्र की हालत सबसे बदतर है। शहर में शामिल हुए 32 गांवों में आज भी स्वच्छता के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। गांवों में कुरड़ी लग रही हैं। पेयजल की व्यवस्था चालू नहीं हो सकी है। सीवर सुविधा तो कोसों दूर है।

जनता रोड पर बना स्कूल- फोटो : SAHARANPUR

देहरादून रोड पर बना मॉल- फोटो : SAHARANPUR

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