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ओपीडी में पहुंच रहे बच्चों में से 40 फीसदी को बुखार

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जिला अस्पताल स्थित वार्ड में बच्चे की जांच करते चिकित्सक - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। मौसम बदलने के साथ बच्चों में जुकाम, खांसी और बुखार की शिकायत शुरू हो गई है। ओपीडी में पहुंचने वाले बाल मरीज मिश्रित बीमारियों के हैं, लेकिन उनमें 40 फीसदी संख्या बुखार, खांसी और जुकाम के मरीजों की है।
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एसबीडी जिला अस्पताल में 11 नंबर कक्ष में बाल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी चलती है। यहां प्रतिदिन 120 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरेंद्र भट्ट ने बताया कि पिछले कुछ दिन की तुलना में मरीज बढ़े हैं, लेकिन अभी स्थिति पूरी तरह कंट्रोल में है। यही वजह है कि बच्चों को भर्ती करने की जरूरत नहीं पड़ रही है। वार्ड में चुनिंदा ही मरीज भर्ती हैं, जिनकी हालत में सुधार है। उन्होंने बताया कि बच्चों में मिश्रित मरीज हैं। जिनमें मौसमी खांसी, हल्का जुकाम, बुखार के साथ ही डायरिया की भी शिकायत आ रही है। करीब 40 फीसदी बच्चे बुखार, खांसी और जुकाम के मामले हैं। डॉ. भट्ट की सलाह है कि बच्चों की सेहत को लेकर कतई भी लापरवाही न बरतें। यदि बच्चों में किसी भी तरह की कोई समस्या है तो तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल में दिखाए।
दवाओं की कमी नहीं
जिला अस्पताल के मेडिकल स्टोर में बच्चों की तमाम दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। जिला अस्पताल के औषधि प्रभारी डॉ. केवी सिंह ने बताया कि अस्पताल के पास बच्चों के इलाज के लिए बुखार, जुकाम, खांसी, डायरिया सहित तमाम बीमारियों की दवाएं उपलब्ध हैं और नियमित रूप से आती रही हैं।
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कोरोना व सामान्य बुखार में अंतर करना मुश्किल
माना जा रहा है कि कोरोना की तीसरी लहर बच्चों को अधिक प्रभावित कर सकती है। बाल रोग विशेषज्ञ का कहना है कि मौसमी फ्लू और कोरोना, दोनों के लक्षण लगभग समान ही होते हैं। ऐसे में अंतर करना मुश्किल रहता है। मगर कोरोना के गंभीर लक्षणों में सूखी खांसी, तेज बुखार, नाक बहने, बदन में बहुत ज्यादा दर्द होना और डायरिया आदि की दिक्कत हो सकती है। ऐसे में बच्चों की सेहत को लेकर और सचेत रहने की जरूरत है।
बच्चों को लेकर लापरवाही
कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों के अधिक प्रभावित होने की आशंका कई माह से जताई जा रही है। संक्रमण को लेकर अस्पताल सबसे खतरनाक जगहों में से एक हैं, लेकिन इसके बाद भी लोग समझने को तैयार नहीं हैं। जिला अस्पताल में पहुंचने वाले लोगों के मुंह पर तो मास्क रहता है, मगर साथ आने वाले बच्चों के प्रति लोग लापरवाही बरत रहे हैं। अस्पताल में प्रतिदिन छोटे बच्चों को बिना मास्क के देखा जा सकता है।

जिला अस्पताल स्थित वार्ड में बच्चे की जांच करते चिकित्सक- फोटो : SAHARANPUR

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