इस बार रावण का पुतला शहर का सबसे ऊंचा पुतला था, जिसकी ऊंचाई 60 फीट थी। खास बात थी कि दशानन का पुतला मंडुवाडीह के शमशाद खान के परिवार ने तैयार किया। कुंभकर्ण के पुतले की ऊंचाई 55 फीट और मेघनाद की ऊंचाई 50 फीट थी। कारीगरों की मानें तो तीनों पुतलों को तैयार करने में लगभग दो लाख रुपये का खर्चा आया।
मंडुवाडीह के शमशाद खान उर्फ गुड्डू का परिवार हर साल की तरह पुतलों को बनाने में तल्लीन हैं। पुतले बनाने वाले शमशाद खान और असलम का कहना है कि वे इसे पेशे के तौर पर न लेकर सांस्कृतिक सौहार्द के रूप में देखते हैं। असलम बताते हैं कि उनकी दूसरी पीढ़ी इसे तैयार कर रही है। करीब 30 साल से उनका परिवार ही इसे बनाता है। पुतला बनाने वालों में बाबू, चट्टी, असलम, शाहिद, आर्यन, शिवनाथ, सुबराती, बनारसी, सन्नो, रेहाना, सलमा शामिल हैं।