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विलुप्त होने की कगार पर नदियां, बचाव के लिए नदियों के संरक्षण की जरूरत

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रामपुर। जिले में अवैध कब्जों की वजह से तीन नदियों का तो अस्तित्व ही गायब हो गया है, जबकि बाकी नदियों की स्थिति भी ठीक नहीं हैं। इनमें से अधिकांश नदियां सिर्फ कागजों में ही बह रही हैं। वास्तविकता में नदियों का कहीं भी पता नहीं है। यदि नदियों की अनदेखी का सिलसिला कुछ इसी तरह जारी रहा, तो वह दिन दूर नहीं होगा, जब बड़ी बड़ी नदियों का अस्तित्व भी खतरे में आ जाएगा। ऐसे में इन नदियों को बचाने के लिए नदियों के संरक्षण की जरूरत है।
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यूं तो प्रकृति रामपुर पर खूब मेहरबान रही है, लेकिन मानवीय लालच ने प्राकृतिक स्रोतों को तहस नहस कर दिया। सिंचाई विभाग के अधिकारी बताते हैं कि पूरे देश में एक मात्र रामपुर ऐसा जिला है, जहां सर्वाधिक नदियां हैं। यहां 17 नदियां बहती थीं। अन्य कोई भी ऐसा जिला नहीं है, जहां इतनी नदियां बहती हों। किन्तु, गुजरते दिनों के साथ रामपुर की नदियां मौके से गायब होती चली गईं। नदियों की जमीनों पर अवैध कब्जे होने लगे। किसी ने नदी की जमीन पर मकान बना लिया, तो किसी ने दुकान सजा ली। यहां तक कि नदियों की जमीन पर किसानों की धान, गेहूं और गन्ने की फसलें लहलहाती हैं। आलम यह है कि जिले की तीन नदियों का अस्तित्व ही गायब हो गया है। इसके अलावा जो नदियां हैं भी, वे सिर्फ बरसाती नदियां बनकर रह गई हैं। जिले की बड़ी नदियों में शामिल कोसी, रामगंगा, भाखड़ा और पीलाखार की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। तीनों नदियों में पानी तो रहता है, लेकिन वह भी भरपूर नहीं। बैगुल, किछिया और बौर नदी में तो कभी कभार ही पानी नजर आता है। ऐसे में इन नदियों का अस्तित्व भी खतरे में पड़ता जा रहा है। हालांकि, सिंचाई विभाग के अफसरों की माने तो इसकी एक वजह यह भी है कि अब पहले की तरह बरसात नहीं होती है। ऐसे में नदियां सूखती चलीं गईं, जहां किसानों ने अवैध कब्जे कर लिए और उनमें फसलें आदि बोने लगे। नतीजा यह हुआ कि आज नदियों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
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