तीन तलाक और कामन सिविल कोड के मसले को लेकर सुन्नी मसलक के लोग केंद्र सरकार के खिलाफ सड़क पर उतर आए। उन्होंने पटवाई में जुलूस निकालकर राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा। केंद्र सरकार को चेताया कि शरीयत में किसी तरह की दखल बर्दाश्त नहीं करेंगे। चाहे उनको कोई भी कुरबानी क्यों न देनी पड़े।
आल इंडिया जमाते रजा-ए- मुस्तफा की जानिब से पटवाई में शरीयत बचाओ कांफ्रेंस का आयोजन किया गया। कांफ्रेंस में सुन्नी मसलक के लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। भारी हुजूम को खिताब करते हुए काजी-ए- शरआ सैयद शाहिद अली ने कहा कि मरकजी हुकूमत जानबूझकर मुसलमानों को परेशान कर रही है। तीन तलाक और कामन सिविल कोड का सहारा लेकर शरीयत में दखलअंदाजी करने का नापाक मंसूबा बना रही है। लेकिन, किसी भी हालत में शरीयत से छेड़छाड़ होने नहीं दी जाएगी। क्योंकि कुरान के कानून को कोई नहीं बदल सकता है और कयामत तक बदला भी जा सकता है।
उन्होंने केंद्र सरकार के नापाक साजिश के खिलाफ मुसलमानों से एक जुट होकर आवाज बुलंद करने और 14 नवंबर को किला मैदान में होनी वाली कांफ्रेंस को कामयाब बनाने की अपील की। इसके बाद काजी-ए- शरआ की अगुवाई में जुलूस निकाला। कई रास्तों से गुजरता हुआ जुलूस थाने के सामने पहुंचा। वहां पहुंचे से मौजूद एसडीएम शाहबाद भीड़ के बीच पहुंचे।
काजी-ए- शरआ ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा। कांफ्रेंस में ये उलमा शामिल थे- कारी तस्लीम रजा, मुफ्ती मोहम्मद वसीम रजवी, मौलाना फरीद रजवी, कारी कामिल रजवी, मौलाना जावेद बेग, हाफिज मोहम्मद अफसर अलीस, हाफिज अब्दुल वाहिद, हाजी जमीर खां, हाफिज यासीन, मोहम्मद नसीम, मास्टर सखावत।