रामपुर। नगर पालिका प्रशासन ने बापू मॉल के 94 दुकानदारों को किराया किस्त जमा करने के लिए नोटिस जारी किया है। इसके बाद भी किराया किस्त जमा न करने पर जमानत राशि में से इसे समायोजित करने व आवंटन निरस्त किए जाने तक की कार्रवाई की जा सकती है। इन दुकानदारों पर करीब पांच करोड़ रुपये का किराया बकाया है।
नगर पालिका प्रशासन की ओर से बापू मॉल में बनी दुकानों में से 94 दुकानों का करीब दो साल पहले आवंटन किया गया था। उस वक्त इन दुकानों के लिए करीब एक लाख रुपये की जमानत राशि जमा करने के साथ ही मासिक किराया भी निर्धारित किया गया था। इसके बाद आवंटियों ने दुकानें तो ले लीं लेकिन, किराया किस्त समय से जमा नहीं कीं।
धीरे-धीरे समय गुजरता रहा और अब मौजूदा समय में इन 94 दुकानदारों पर करीब पांच करोड़ रुपये का किराया बकाया हो गया है। पूर्व में भी दुकानदारों को किराया जमा करने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं लेकिन, इसके बावजूद किराया जमा नहीं किया गया। जिस पर अब इन 94 दुकानदारों को अंतिम नोटिस जारी किया गया है। इसके बाद भी किराया किस्त जमा न होने पर दुकानदारों द्वारा जमा की गई जमानत राशि से इसे समायोजित करने के साथ ही आवंटन निरस्त करने तक की कार्रवाई की जाएगी।
अभी भी करीब दो सौ दुकानों का नहीं हो सका है आवंटन : करीब दो साल पहले नगर पालिका बोर्ड की बैठक में बापू मॉल की दुकानों के आवंटन का प्रस्ताव पास होने के बाद भी अब तक करीब 100 दुकानों का ही आवंटन हो सका है। इसके साथ ही करीब दो सौ दुकानें अब भी आवंटित होने से रह गई हैं। वहीं बापू मॉल में बने 16 हालों में से एक भी हाल आवंटित नहीं हो सका है।
सपा सरकार में मिली थी मॉल के निर्माण को मंजूरी, अखिलेश यादव ने किया था उद्घाटन: बापू मॉल के निर्माण को समाजवादी सरकार में मंजूरी मिली थी। करीब बीस करोड़ रुपये की लागत से बने इस मॉल में 300 से अधिक दुकानों एवं 16 हॉल का निर्माण किया गया था। मॉल का निर्माण सीएंडडीएस (कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज) की ओर से किया गया था। निर्माण कार्य पूरा होने पर इसे नगर पालिका को हस्तांतरित कर दिया गया। तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने साल 2016 में रामपुर आकर बापू मॉल का उद्घाटन किया था।
नगर पालिका की कर अधीक्षक मयूरी शर्मा ने कहा कि बापू मॉल के 94 दुकानदारों को किराया किस्त जमा न करने पर नोटिस जारी किया गया है। इससे पूर्व भी नोटिस जारी किए जा चुके हैं। नोटिस में दी गई समयावधि में किराया किस्त जमा न होने पर इसे संबंधित दुकानदार द्वारा जमा की गई जमानत धनराशि से समायोजित करने के साथ ही दुकान का आवंटन भी निरस्त किया जा सकता है।