वहीं डिजाइनर करवे महिलाओं ने खरीदना शुरू कर दिया है। वैसे तो बाजार में चांदी के करवे भी आने लगे हैं। इसके बाद भी सबसे अधिक बिक्री मिट्टी के बने करवों की ही होती है।
करवाचौथ पर पति के दीर्घायु एवं परिवार की सुख समृद्धि के लिए सुहागिनें निर्जला व्रत रखती हैं। विधि विधान से पूजा-पाठ करती हैं। पूजा के दौरान करवों का होना जरूरी होता है।
महिलाओं को आकर्षित करने के लिए इस बार कुम्हार मिट्टी के बने करवों को आकर्षक ढंग से सजाने में लगे हुए हैं। इन करवों पर फूल के साथ ही आकर्षक कलाकृतियां बनाई जा रही हैं।
साथ ही विभिन्न रंगों से सजाया जा रहा है। वैसे तो आधुनिक दौर में चांदी के करवे भी बाजार में हैं। इसके बावजूद आज भी सबसे अधिक बिक्री मिट्टी के बने करवों की हो रही है।
इससे कुम्हारों को अच्छी आमदनी होती है। महंगाई के दौर में मिट्टी के बने करवे मीडियम और गरीब तबके के लोगों के लिए आसानी से उपलब्ध हैं।
वर्तमान में साधारण मिट्टी का करवा 10 रुपये, जबकि डिजाइनर करवा 25 से 30 रुपये तक बाजार में उपलब्ध है। वहीं कुम्हार शिवदेवी और ओरीलाल का कहना है कि मिट्टी के लिए तालाब का आवंटन नहीं है।
1400 रुपये ट्रॉली मिट्टी खरीदनी पड़ती है। शिवलाल और रफीक का कहना है कि कंडा से लेकर मिट्टी तक का इंतजाम करने में आठ से लेकर 20 रुपये तक का खर्च आता है। एक करवा पर बमुश्किल से दो से पांच रुपये बच पाता है।