रायबरेली। कांग्रेस के गढ़ के रूप में विख्यात रायबरेली और अमेठी संसदीय सीट पर सियासी ग्रहण लग रहा है। कभी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी तो वर्तमान में सोनिया गांधी की वजह से यह सीट वीवीआईपी मानी जाती रही है, लेकिन जब से अमेठी में स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी को शिकस्त दी, तब से बराबर भाजपा इस गढ़ को फतह करने के लिए हमलावर है।
इसी का नतीजा है कि इस बार पंचायत चुनाव में जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी कांग्रेस के हाथ से छिटक गई। ब्लॉक प्रमुखों के लिए कांग्रेस अपने दावेदार भी नहीं उतार सकी।
कांग्रेस को उस समय और तगड़ा झटका लगा, जब सांसद सोनिया गांधी को जिला विकास एवं समन्वय अनुश्रवण समिति (दिशा) के अध्यक्ष पद से हटाकर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को पदासीन कर दिया गया। पंचायत चुनाव के बाद भाजपा की नजर अब यहां विधानसभा और फिर लोकसभा चुनाव में फतह हासिल करने की है।
2004 से सोनिया गांधी लगातार सांसद चुनी जाती रहीं। अमेठी से राहुल गांधी सांसद बनते रहे। 2014 में स्मृति ईरानी ने अमेठी में राहुल को घेरा लेकिन जीत न सकीं।
दिसंबर 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लालगंज मॉडर्न कोच फैक्टरी और मार्च 2019 में अमेठी में जनसभा कर गांधी परिवार पर तीखा हमला बोला था।
इसका यह असर रहा कि 2019 में स्मृति ईरानी फिर अमेठी सीट से मैदान में उतरीं और राहुल गांधी को हराकर इतिहास रच दिया। अमेठी कांग्रेस की परंपरागत सीट होने के कारण पार्टी को हार से जबरदस्त झटका लगा।
अपने ही कांग्रेस से होते रहे दूर
एमएलसी दिनेश प्रताप भाजपा के हो गए। 2017 में हरचंदपुर विधानसभा सीट से चुनाव जीतने वाले व एमएलसी के भाई राकेश सिंह ने भी कांग्रेस से दूरियां बनाई।
बाहुबली स्व.अखिलेश सिंह ने बेटी अदिति सिंह को कांग्रेस से चुनाव लड़ाया और जिताया, लेकिन बदले सियासी समीकरण से अदिति सिंह भी कांग्रेस से विधायक होने के बाद भी भाजपा के पक्ष में खड़ी होती नजर आती हैं।
लोकसभा चुनाव में सोनिया गांधी के करीबी रहे एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह ने उन्हें ही चुनौती दी। असर ये रहा कि लोकसभा चुनाव में सोनिया गांधी की जीत का अंतर कम हो गया।
ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के चुनाव में कांग्रेस का हाल यह रहा कि जिला पंचायत सदस्य के नामांकन होने के बाद उम्मीदवारों की घोषणा हुई, जिससे कांग्रेस की किरकिरी हुई।
सोनिया को दिशा के चेयरमैन पद से हटाना भाजपा की मुहिम का हिस्सा माना जा रहा है। जाहिर है कि 2022 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में अपनी इस कल्पना को साकार करने के लिए भाजपा पूरी ताकत के साथ जुटेगी।
सियासी गणित मजबूत करने की रणनीति
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने विकास कार्यों के जरिए और लोगों से मेलजोल बढ़ाकर अमेठी में अपनी लोकप्रियता बढ़ाई है। अमेठी संसदीय क्षेत्र में आने वाले सलोन विधानसभा में केंद्रीय मंत्री ने पॉलीटेक्निक, आईटीआई, पावर प्लांट, छोटी-बड़ी सड़कें, ब्लॉक मुख्यालय, डीह सीएचसी में ऑक्सीजन प्लांट और गांव-गांव पंचायत घर और बरातघर बनवाकर आम लोगों के दिल में जगह बनाई।
सियासी समझ रखने वालों की मानें तो भाजपा ने रणनीति के तहत केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को दिशा का चेयरमैन बनाया है, ताकि विधानसभा के बाद होने वाले लोकसभा चुनाव में केंद्रीय योजनाओं के जरिए रायबरेली में भाजपा अपनी पैठ बना सके।
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी न सिर्फ सलोन में अफसरों के साथ विकास कार्यों की कई बार समीक्षा कर चुकी हैं, बल्कि पिछले साल रायबरेली कलेक्ट्रेट के बचत भवन में विकास कार्यों को लेकर अफसरों से सवाल जवाब कर चुकी हैं। अब तो वह दिशा की चेयरमैन बना दी गई हैं तो जाहिर है कि सोनिया गांधी के गढ़ में उनका दखल अब और बढ़ गया है।
धन, धर्म और सत्ता का दुरुपयोग करके भाजपा ने अपनी सफलता तो दिखा दी है, लेकिन जनता को असलियत का अहसास हो गया है। स्वास्थ्य, बेरोजगारी, महंगाई के मुद्दे पर जनता पिस रही है। जनता इसका जवाब विधानसभा और लोकसभा के चुनाव में भाजपा को देगी।
विनय द्विवेदी, जिला प्रवक्ता, कांग्रेस
चुनाव की तैयारी चल रही है। पंचायत चुनाव में जिस तरह से भगवा परचम लहराया है, उसी तरह अब विधानसभा चुनाव में भाजपा बुलंदी छुएगी। इसके बाद लोकसभा में भाजपा का सांसद बनाकर दिल्ली पहुंचाना है। जनता जो चाह रही है, वही कर रही है।
रामदेव पाल, जिलाध्यक्ष, भाजपा