4-रायबरेली में शुक्रवार को एम्स में स्थापित ब्लडबैंक।संवाद
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रायबरेली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में ब्लड बैंक खोलने की कवायद शुरू हो गई है। ब्लड की व्यवस्था बगैर से गंभीर मरीजों के इलाज और सर्जरी की सुविधा शुरू नहीं की जा सकती है। भवन आदि की व्यवस्था करने के बाद एम्स प्रशासन ने ब्लड बैंक में लगने वाली अत्याधुनिक मशीनों की डिमांड स्वास्थ्य मंत्रालय को भेज दी है। जल्द ही मशीनें मिलने के बाद ब्लड बैंक के साथ सुपर स्पेशलिस्ट सेवाएं शुरू की जाएगी। उम्मीद है कि अगले जनवरी माह से ये सारी सेवाएं मरीजों को मिलनी शुरू हो जाएंगी।
एम्स में 13 अगस्त 2018 से ओपीडी, 29 अगस्त 2019 से एमबीबीएस की पढ़ाई के साथ ही बीती नौ जुलाई से 300 बेड का हॉस्पिटल शुरू किया गया है। सीटी स्कैन, एमआरआई आदि जांचें भी शुरू कर दी गई हैं। एम्स में सामान्य मरीजों को भी इलाज के लिए भर्ती किया जा रहा है। कई सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की व्यवस्था नहीं से अब तक सेवाएं आरंभ नहीं की गई हैं। खासकर गंभीर मरीजों को भर्ती करने के साथ ही सर्जरी की सुविधा नहीं शुरू की गई है। हालांकि, छोटा आपरेशन थियेटर (ओटी) का संचालन किया गया है।
गंभीर मरीजों के इलाज और सर्जरी के लिए ब्लड बहुत जरूरी होता है। एम्स में अब तक ब्लड का बंदोबस्त नहीं हो सका है। इसी कारण सर्जरी और गंभीर मरीजों को भर्ती करने का काम शुरू नहीं किया गया है। एम्स प्रशासन ने ब्लड बैंक खोलने के लिए कवायद तेज कर दी है। संस्थान स्तर पर सारी तैयारी करने के साथ अधिशासी निदेशक प्रो. अरविंद राजवंशी ने स्वास्थ्य मंत्रालय को मशीनों के लिए डिमांड भेजी है। जल्द ही मशीनों के आते ब्लड बैंक काम करना शुरू कर देगा।
ब्लड स्टोरेज, कंपोनेंट सेपरेटर सहत अन्य मशीनें लगेंगी
- एम्स का ब्लड बैंक पूरी तरह से सुसज्जित रहेगा। ब्लड के कंपोनेंट को अलग-अलग करने के लिए कंपोनेंट सेपरेटर मशीन के साथ प्लाज्मा आदि की व्यवस्था होगी। ब्लड बैंक के शुरू होने एम्स में आने वाले मरीजों को ब्लड के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा।
ब्लड बैंक के लिए एम्स स्तर पर तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। मंत्रालय को ब्लड बैंक में लगने वाली मशीनों के लिए डिमांड भेजी गई है। ब्लड बैंक खुलने के साथ ही गंभीर मरीजों को भर्ती करने के साथ ही सर्जरी का भी काम शुरू हो जाएगा। - समीर शुक्ला, रजिस्ट्रार/ वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी एम्स