रायबरेली। मामा चौराहे के पास कूड़े में पड़ी मिलीं दवाओं की कीमत करीब 12 लाख रुपये के आसपास थी। इनमें से पांच लाख की कीमत दवाएं जल गईं थीं जबकि सात लाख से ज्यादा कीमत की दवाएं मौके पर ही पड़ी मिलीं। इनमें से कोई भी दवा अभी एक्सपायरी नहीं हुई थी। ये दवाएं मुंबई, दिल्ली स्थित 39 कंपनियाें की थीं।
बरामद दवाओं की गुरुवार को छंटनी कराई गई तो इसका खुलासा हुआ। अब दवा कंपनियों को नोटिस भेजकर जवाब तलब करने की तैयारी चल रही है।
एफएसडीए की टीम कंपनियों के अधिकारियों से पूछताछ कर यह पता लगाएगी कि जिले के किन-किन मेडिकल स्टोर संचालकों व थोक दुकानदारों की इन दवाओं की आपूर्ति की गई थी। इसका जवाब आने के बाद अधिकारी संबंधित मेडिकल स्टोर और थोक दुकानों का स्टॉक चेक करेंगे।
लखनऊ-प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित मामा चौराहे के पास नगर पालिका के कूड़े के ढेर में लाखों की दवाएं जला दी गईं थीं। अमर उजाला ने इस मामले का खुलासा किया तो हड़कंप मच गया था।
अब अधिकारी इस प्रकरण की जांच कर रहे हैं। गुरुवार को कलेक्ट्रेट स्थित खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) के मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी इंद्र बहादुर यादव, औषधि निरीक्षक शिवेंद्र सिंह की मौजूदगी में कर्मियों ने दवाओं की छंटनी शुरू की।
अधिकारियों के मुताबिक बरामद दवाओं की छंटनी में नेक्टर बायो फार्मा प्राइवेट लिमिटेड, अंधेरी मुंबई की बनी विटामिन की करीब चार लाख कीमत की सीरप मिली है।
फर्मा टावर कंपनी इंडस्ट्रियल एरिया, नई दिल्ली की कंपनी के इंजेक्शन मिले हैं। ये इंजेक्शन बीपी से संबंधित दिक्कत होने पर दिये जाते हैं। मेडले फार्मास्यूटिकल लिमिटेड, अंधेरी मुंबई की कंपनी की विटामिन बढ़ाने के लिए प्रयोग में लाई जाने वाली कैप्सूल भी मिला है।
जांच में पता चला है कि मुंबई, नई दिल्ली समेत 39 कंपनियों की दवाएं बरामद की हुई हैं। अधिकतर दवाएं हिमाचल प्रदेश के सोनल जिले के पट्टी तहसील स्थित इंडस्ट्रियल एरिया की बनी हैं।
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी का कहना है कि 39 दवा कंपनियों को नोटिस भेजकर जवाब मांगा जा रहा है। पता लगाया जा रहा है कि उन्होंने कहां-कहां पर दवाओं की आपूर्ति की। यह जानकारी उपलब्ध होने के बाद स्टॉक चेक करके मामले में कार्रवाई की जाएगी।
2020 और 2021 में बनी थीं दवाएं
जांच में पता चला है कि कूड़े से बरामद की गईं दवाएं 2020 और 2021 में बनी थीं। वर्ष 2020 की दवाओं की एक्सपायरी डेट 18 माह, जबकि 2021 में बनी दवाओं की एक्सपायरी डेट नौ माह तो किसी की दो माह शेष थी। एक्सपायर होने से पहले ही इन दवाओं को कूूड़े में फेंक दिया गया, जो कई सवाल खड़े कर रहा है।
एक दिन में नहीं हो पाया छंटनी का काम
दवाओं की छंटनी का काम पूरा नहीं हो पाया। सुबह से ही अधिकारी और कर्मचारी दवा की छंटनी को लेकर हलाकान रहे। जांच में यह बात भी सामने आई है कि कूड़े में जलाई गई दवाओं की कीमत पांच लाख से ज्यादा थी। वहीं बरामद की गई दवाओं की कीमत भी सात लाख से ज्यादा की है। उधर, अभी इस बात का खुलासा नहीं हो पाया है कि कूूड़े में दवा फेंकने का मकसद क्या था। औषधि निरीक्षक का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। कूड़े में फेंकने वाले लोग जल्द बेनकाब किए जाएंगे।
अफसरों के रडार पर कई बड़े दवा कारोबारी
कूड़े में दवा जलाने का मामला लखनऊ में बैठे उच्चाधिकारियों तक पहुंच गया है। इससे अधिकारी इस मामले को लेकर हलाकान हैं और जांच करने में जुटे हैं। बताया जा रहा है कि मामले का खुलासा होने पर जिले के कई बड़े दवा कारोबारी अधिकारियों के रडार पर हैं।
अधिकारी इन बड़े दवा कारोबारियों की गुपचुप तरीके से जानकारी भी जुटा रहे हैं। उधर, चर्चा है कि मधुबन रोड के अलावा और शहर के कई जगहों पर थोक या फिर मेडिकल स्टोर संचालित कर रहे कारोबारी संदेह के घेरे में हैं। यही नहीं कि एम्स के पास दवा का कारोबार करने वाले कई लोग भी जांच के दायरे में हैं। चर्चा इस बात की भी है कि एम्स के पास कुछ ऐसे कारोबारी दवा का कारोबार कर रहे हैं, जो कूड़े से बरामद की गई कुछ दवाओं की आपूर्ति दुकानों पर करते हैं।