रायबरेली। डेंगू, टाइफाइड और मियादी बुखार का कहर बढ़ गया है। ऐेसे में प्लेटलेट्स की डिमांड बढ़ गई है, लेकिन जिला अस्पताल में इसके बंदोबस्त नहीं हैं। ऐसी स्थिति में मरीजों की जान बचाने के लिए उन्हें लखनऊ रेफर करना पड़ रहा है। ब्लड बैंक में अब तक ब्लड सेपरेटर मशीन भी नहीं लगाई है। ऐसी स्थिति में प्लेटलेट्स, सीआरबीसी और प्लाज्मा की सुविधा के लिए जिला अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों को भटकना पड़ रहा है।
मौसम में बदलाव के साथ ही जिले में बुखार का खतरा बढ़ गया है। डेंगू और टाइफाइड के मरीजों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। डेंगू, टाइफाइड और मियादी बुखार के रोगियों के इलाज के लिए प्लेटलेट्स की जरूरत होती है, लेकिन जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में यह सुविधा नहीं है।
ऐसी स्थिति में मरीजों को लखनऊ रेफर करना पड़ रहा है। जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. बीरबल का कहना है कि अमूमन एक माह में करीब 30 ऐसे मरीज आते हैं, जिनमें प्लेटलेट्स कम रहता है। हालांकि कई मरीजों में प्लेटलेट्स अपने आप ही बढ़ जाते हैं, लेकिन कुछ मरीजों में प्लेटलेट्स चढ़ाना जरूरी होता है। ऐसे मरीजों को लखनऊ भेजना पड़ता है।
निजी ब्लड बैंक से मरीजों को मिली राहत
शहर के सुल्तानपुर रोड स्थित मलिकपुर आइमा ओवरब्रिज के नीचे खोला गया रायबरेली चैरिटेबल ब्लड बैंक मरीजों को राहत देने के लिए तैयार है। जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. बीरबल का कहना है कि अस्पताल के ब्लड बैंक में सुविधा नहीं है, लेकिन चैरिटेबल ट्रस्ट के ब्लड बैंक से जरूरत पड़ने पर प्लेटलेट्स, प्लाज्मा और सीआरबीसी मंगवाया जाएगा। निजी ब्लड बैंक से कुछ राहत जरूर मिली है।
बुखार से पीड़ित बच्चे, पंखे बने शोपीस, टपक रहा पसीना
जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में लापरवाही नहीं थम रही है। बच्चों के इलाज के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। यह हाल तब है, जब वायरल का प्रकोप तेजी के साथ बढ़ रहा है। बुखार से पीड़ित बच्चे जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं।
मंगलवार को बिजली न होने के कारण बच्चा वार्ड में पंखे नहीं चले। बच्चों को गर्मी से बचाने के लिए लोगों ने हाथपैर मारा। गर्मी के कारण वार्ड में बच्चे परेशान दिखे। यही हाल जिला अस्पताल के अन्य वार्डों में भी देखने को मिला। पंखों के न चलने के कारण मरीजों को परेशान होना पड़ा, लेकिन जिला अस्पताल प्रशासन ने समस्याओं को लेकर कोई ध्यान नहीं दिया।
पैरासीटामॉल की किल्लत, बाकी दवाओं की भरमार
जिले के सीएमएसडी गोदाम में पैरासीटामॉल टैबलेट की दवा की समस्या है। हालांकि अन्य दवाओं की भरमार है। इंचार्ज चीफ फार्मासिस्ट प्रशांत शुक्ला का कहना है कि डेढ़ लाख टैबलेट पैरासीटामॉल उपलब्ध है।
10 लाख टैबलेट की डिमांड और की गई है। 1.80 लाख बच्चों की पैरासीटामॉल सिरप उपलब्ध है। इसके अलावा छह लाख एजिथ्रोमाइसिन टैबलेट, 70 हजार मल्टी विटामिन टैबलेट, ढाई लाख सेटिजिन, तीन लाख पैकेट ओआरएस और आठ लाख पैकेट जिंक उपलब्ध है। दवाओं की कमी नहीं है। जल्द ही चार महीने के लिए पर्याप्त दवाएं शासन से उपलब्ध हो जाएंगी।
जिले में संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ने से पहले ही जरूरी दवाओं की व्यवस्था कर ली गई है। पैरसीटामॉल टैबलेट की डिमांड बढ़ने के कारण समस्या है, लेकिन इसी सप्ताह 10 लाख टैबलेट आने के बाद समस्या दूर हो जाएगी। ब्लड बैंक में प्लेटलेट्स की उपलब्धता नहीं है। गंभीर मरीजों को लखनऊ भेजवाया जाता है।
डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ