रायबरेली। वर्ष 2025 तक जिले को क्षयरोग मुक्त बनाने का सपना साकार होता नहीं दिख रहा। जिला अस्पताल स्थित जिला क्षय रोग अधिकारी कार्यालय में टीबी की जांच के लिए लगी सीबी-नॉट मशीन खराब पड़ी होने से बीते कई दिनों से क्षयरोगियों की जांच का कार्य ठप पड़ा है। इससे समय से टीबी रोगी का पता लगाकर उसका इलाज शुरू नहीं हो पा रहा है।
जिले की अन्य सीएचसी में लगी मशीनें भी टीबी की जांच में धोखा दे रही हैं। इसकी जानकारी के बाद भी परेशानी दूर कराने को लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी लापरवाह बने हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने वर्ष 2025 तक भारत को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए जांच से लेकर इलाज तक की व्यवस्था सीएचसी स्तर तक करा दी गई है। निजी अस्पतालों के संचालकों को भी निर्देशित किया गया है कि टीबी के मरीजों को क्षय रोग विभाग में उपलब्ध दवाएं ही बताई जाए।
महंगी दवाएं होने के बावजूद विभागीय स्तर से टीबी की जांच और दवाओं की मुफ्त व्यवस्था की जाती है। जिले में क्षयरोगियों की जांच के लिए जिला अस्पताल स्थित क्षयरोग अधिकारी कार्यालय और सीएचसी लालगंज में सीबी-नॉट मशीन लगाई गई है।
इसके अलावा सीएचसी बछरावां, नसीराबाद, सलोन, खीरों, डलमऊ, ऊंचाहार और जिला अस्पताल में भी जांच मशीन लगाई गई है। जिला अस्पताल में इस मशीन से कोरोना मरीजों की भी जांच की जा रही है लेकिन सीएचसी में सिर्फ टीबी रोगियों के जांच के ही आदेश हैं।
क्षयरोग अस्पताल में लगी सीबी-नॉट मशीन कई दिनों से खराब पड़ी है। यहां टीबी रोगियों की जांच नहीं हो पा रही है। इससे टीबी आशंकित मरीजों का समुचित इलाज तक शुरू नहीं हो पा रहा है। बछरावां, डलमऊ व अन्य अस्पतालों में भी जांच प्रभावित है। अधिकारी जल्दी ही इंजीनियर बुलवाकर मशीनों की जांच कर ठीक कराने की बात कह रहे हैं।
साल भर में 1525 की सीबी-नॉट जांच, 623 पॉजिटिव
क्षयरोगियों की गंभीरता की जांच सीबी-नॉट मशीन से करके उन्हें श्रेणीवार तय कर उसी हिसाब से दवा दी जाती है। साल भर में जिला अस्पताल स्थित क्षय रोग अस्पताल में 1025 लोगों की सीबी-नॉट मशीन से जांच की गई, जिसमें 426 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई।
इसी तरह लालगंज सीएचसी में 500 लोगों की जांच में 197 लोग पॉजिटिव पाए गए। अब तक 1525 लोगों की जांच में 623 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उनका इलाज किया जा रहा है, लेकिन वर्तमान समय में जांच प्रभावित होने के कारण मरीजों का इलाज तक शुरू नहीं हो पा रहा है।
लिखी जा रही बाजार की दवाएं
जिला अस्पताल स्थित क्षयरोग अधिकारी कार्यालय में संचालित टीबी क्लीनिक में चलने वाली क्षय रोगियों की ओपीडी में मौजूद चिकित्सक भी मरीजों के इलाज के लिए बाजार में बिकने वाली दवाएं लिखते हैं। इससे मरीजों को टीबी की महंगी दवाएं बाजार से खरीदने की परेशानी उठानी पड़ रही है। इस संबंध में पीड़ितों की शिकायत के बाद भी अभी तक किसी भी चिकित्सक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गयी है।
जिले के बछरावां, डलमऊ व अन्य अस्पतालों में लगी जांच मशीनों में खामी आ गयी थी। इंजीनियर बुलवाकर मशीनों को ठीक करवा दिया गया है। जिला अस्पताल की सीबी-नॉट मशीन का यूपीएस खराब हो गया है। उसे बनवाने के लिए भेजा गया है। जल्दी ही इससे जांच कार्य शुरू हो जाएगा। क्लीनिक में मरीजों को बाजार से खरीदने के लिए कोई दवाएं नहीं लिखी जा रही है।
डॉ. अनुपम कुमार सिंह, जिला क्षय रोग अधिकारी