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शारदा सहायक नहर की प्रतापगढ़ ब्रांच में हुआ रिसाव, 40 एकड़ भूमि जलमग्न

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ऊंचाहार (रायबरेली)। तहसील क्षेत्र में लबेदवा गांव के पास मंगलवार शाम शारदा सहायक नहर से निकली प्रतापगढ़ ब्रांच में रिसाव हुआ था। रिसाव होने से करीब 40 एकड़ भूमि जलमग्न हो गई।
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सूचना के बाद सिंचाई विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची, लेकिन इसके पहले किसानों ने जेसीबी की मदद से रिसाव को बंद कराया। रिसाव बंद होने से किसानों ने राहत की सांस ली। सिंचाई विभाग के अफसर इस रिसाव को आम बात बता रहे हैं।
वहीं यदि कटान हो जाती तो आसपास के गांवों में पानी तबाही मचा सकता था। पटरियों और उगी झाड़ियों को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि सालों से इसकी सफाई नहीं हुई है न ही पटरियों की मरम्मत कराई गई है।
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जिले से होकर निकले शारदा सहायक नहर का टेल ऊंचाहार क्षेत्र के मिर्जापुर ऐहारी के पास है। इसके आगे शारदा सहायक नहर दो भागों में बंट जाती है। इसमें एक इलाहाबाद ब्रांच और दूसरी प्रतापगढ़ ब्रांच के नाम से जानी जाती है।
दोनों ब्रांचों की पटरियों की हालत दयनीय है। यही वजह है कि प्रतापगढ़ ब्रांच में लबेदवा गांव के पास मंगलवार की शाम रिसाव हो गया। पानी आसपास के खेतों में जा रहा था। नहर में रिसाव की खबर से लबेदवा, पूरे मिश्रन, हजारीबाग, गंगेहरा, गुलालगंज सहित आसपास के गांवों में हड़कंप मच गया।
इसकी सूचना किसानों ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को दी। शारदा सहायक नहर में रिसाव की सूचना पर सिंचाई विभाग के अफसरों में हड़कंप मच गया। रात में ही सिंचाई खंड रायबरेली के सहायक अभियंता मोनिस और सिंचाई खंड प्रतापगढ़ के सहायक अभियंता शैलेंद्र की अगुवाई में टीम पहुंची।
लेकिन इसके पहले ग्रामीणों ने रात में ही नहर के रिसाव को बंद करने की कोशिश की, लेकिन कामयाबी नहीं मिलने पर जेसीबी की मदद से पटरी में मिट्टी भराई कराकर रिसाव बंद कराया।
पानी का रिसाव बंद होने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। ग्राम प्रधान अजय कुमार ने बताया कि ग्रामीणों ने जेसीबी मंगाकर नहर की पटरी में मिट्टी भराई है, जिससे नहर का रिसाव बंद हो गया है। अब किसी प्रकार का खतरा नहीं है।
आंख मूंद कर छोड़ दिया जाता पानी, नहीं कराई जाती चेकिंग
एक माह पहले शारदा सहायक नहर को बंद किया गया था। इससे नहर में पानी कम हो गया था। बताते हैं कि इस दौरान चूहों ने नहर की पटरी में छेद कर दिया था। नहर में जब दोबारा पानी छोड़ा गया तो इन्हीं छेद से पानी रिसाव शुरू हो गया।
पानी का बहाव तेज होने की वजह से छेद बढ़ गया और रिसाव तेज गति से होने लगा। ग्रामीण राम दुलारे, अशोक कुमार, वीरेंद्र कुमार, जगदीश ने बताया नहर में आंख मूंदकर पानी छोड़ दिया जाता है, लेकिन पानी छोड़ने के यह तक नहीं देखा जाता है कि कहां पटरियां जर्जर है कहां पानी बह रहा है।
यदि उसी समय देख लिया जाए तो यह नौबत कभी न आए। यही कारण है कि नहर की पटरी में रिसाव शुरू हो गया था। समय रहते गांव के लोगों ने देख लिया। वरना दृश्य भयावह हो सकता था।
ग्रामीणों की सजगता से टली बड़ी घटना
प्रतापगढ़ ब्रांच में हुए रिसाव लेकर ग्रामीण सजग थे। उनकी सजगता की वजह से बड़ी घटना होने से बच गई। यदि समय रहते रिसाव बंद न किया जाता तो क्षेत्र के लबेदवा, भखरी, पावरगंज, झालाबाग, रायपुर, गंगेहरा, गुलालगंज आदि गांवों में पानी भारी तबाही मचा देता। उधर पास में स्थित उमरन झील में भी बाढ़ का खतरा बढ़ सकता था। नहर में रिसाव होने से लगभग 40 एकड़ जमीन में पानी का भराव हुआ है। खेतों में कोई फसल न होने से किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ है।
अक्सर पटरी में चूहे कर देते हैं छेद
सिंचाई विभाग के प्रतापगढ़ खंड के अधिकारियों की उदासीनता की हद हो गई है। अधिकारी अपनी लापरवाही छुपाने के लिए नहर की पटरी में रिसाव की घटना को आम बात बता रहे हैं। जबकि नहर में हो रहे रिसाव को अगर समय रहते बंद ना किया जाता तो हालात खराब हो सकते थे। आसपास के गांवों की लगभग 10 हजार की आबादी खतरे में पड़ जाती।
जिला प्रशासन की नींद हराम हो जाती, लेकिन ऑफिस में बैठकर आराम फरमाने व वाले अफसरों को इन बातों सेे कोई फर्क नहीं पड़ता है। इस बाबत सिंचाई खंड प्रतापगढ़ के अधिशाषी अभियंता अरविंद वर्मा ने बताया कि रात में ही मौके पर टीम भेजी गई थी। नहर के रिसाव को बंद करा दिया गया है। इस तरह की घटनाएं आम बात हैं। अक्सर पटरी में चूहे छेद कर देते हैं, जिसको ठीक कराया जाता है। यह किसी की लापरवाही से नहीं हुआ है। इसलिए जांच की कोई आवश्यकता नहीं है।
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