लालगंज (रायबरेली)। मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट गंगा एक्सप्रेसवे के लिए ऐहार गांव स्थित मकानों के अधिग्रहण के एवज में मिलने वाली मुआवजा राशि में मनमानी बरतने का मामला सामने आया है। इससे प्रभावित गांव के प्रभावित व्यक्तियों ने अधिकारियों पर मुआवजा क्षतिपूर्ति निर्धारित करने में गड़बड़ी का आरोप लगाया है।
पीड़ितों ने सामूहिक रूप से मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर प्रभावित लोगों की मौजूदगी में किसी सक्षम अधिकारी से भौतिक सत्यापन व मुआवजा मूल्यांकन कराने की मांग की है।
ऐहार गांव निवासी अमित मिश्रा, प्रदीप, अनुराग तिवारी, कृष्ण कुमार गुप्ता समेत 38 प्रभावित लोगों ने संयुक्त रुप से सीएम योगी को भेजे गए पत्र में बताया गया कि एनएच 232 पर सड़क के किनारे स्थित उनके मकान गंगा एक्सप्रेस-वे की जद में आ रहे है।
अधिग्रहण को लेकर प्रभावित लोगों ने आपत्तियां दाखिल की थी। आरोप है कि सक्षम अधिकारियों द्वारा उनकी आपत्तियों का अभी तक निस्तारण नहीं किया गया।
अधिग्रहण के बदले में मुआवजा क्षतिपूर्ति का मूल्यांकन प्रभावित लोगों की गैर मौजूदगी में बिना भौतिक सत्यापन किए ही मनमाने तरीके से कर लिया गया। इसके कारण एक ही परिधि में आने वाले प्रभावित लोगों का मूल्यांकन अलग-अलग है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क के किनारे बने उनके भवन व्यापारिक प्रतिष्ठान हैं। इस भवनों में चलाए जा रहे उनके रोजगार के अलावा भरण पोषण का उनके पास और कोई भी जरिया नहीं है, जिससे अधिग्रहण के बाद विस्थापित लोगों को जीवन यापन करना मुश्किल हो जाएगा।
इससे पीड़ित परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच जाएंगे। मिलने वाले मुआवजे से एनएच के किनारे भूमि खरीदना संभव नहीं होगा। इस लिए भौतिक निरीक्षण कराकर तय किए गए मुआवजे की चार गुना राशि का भुगतान प्रभावित लोगों को कराया जाए।