रायबरेली। शहर में कैनाल रोड स्थित संजीवनी नर्सिंग होम मेें सात माह में दो प्रसूताओं की मौत और गर्भपात के दौरान ऑपरेशन से संबंधित उपकरण पेट में छोड़ने के मामले के बाद अस्पताल का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया है।
सीएमओ ने लाइसेंस निलंबित करते हुए हॉस्पिटल में मरीजों की भर्ती पर रोक लगा दी है। सीएमओ ने जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित करके 15 दिन में जांच रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं। हॉस्पिटल संचालक को भी अपना पक्ष रखने का आदेश दिया गया है।
31 मार्च को लालगंज के गरीब सिंह का पुरवा की सुधा को प्रसव पीड़ा होने पर संजीवनी नर्सिंग होम लाया गया था। आरोप है कि इलाज में लापरवाही के कारण महिला की मौत हो गई थी।
हंगामे के बाद सीएमओ ने जांच के लिए एसीएमओ डॉ. खालिद रिजवान और डॉ. अरविंद कुमार की टीम गठित कर दी थी।
इससे पहले 15 सितंबर 2021 को इसी अस्पताल में अमेठी के भदैया निवासी प्रियंका के पेट में ऑपरेशन से संबंधित उपकरण का टुकड़ा छोड़ने के मामले की जांच जांच चल रही है।
यही नहीं इसी अस्पताल में 18 सितंबर 2021 को भदोखर थाना क्षेत्र के बेलाखारा गांव निवासी सावित्री देवी की भी इलाज के दौरान मौत हो गई थी।
हंगामे के बाद मामले की जांच चल रही है। सात माह में तीन बड़ी घटनाओं के बाद सीएमओ ने संजीवनी नर्सिंगहोम के लाइसेंस को निलंबित कर दिया है।
मरीजों की भर्ती पर रोक लगा दी है।अस्पताल के संचालक को अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया है। सीएमओ ने जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम भी गठित की है। टीम को 15 दिन में अपनी रिपोर्ट देनी होगी। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
शहर के कैनाल रोड स्थित संजीवनी नर्सिंग होम का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया है। यदि इस दौरान अस्पताल संचालित मिला तो मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है।
डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ