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यूपी में प्रमोशन में हो सकता है कोटा खत्म

Sat, 24 Nov 2012 01:35 PM IST
लखनऊ/ब्यूरो
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पदोन्नति में अनुसूचित जातियों को आरक्षण का प्रावधान खत्म करने वाले विधेयक को प्रवर समिति ने ज्यों का त्यों पारित कर विधान परिषद को वापस भेज दिया है। नेता सदन अहमद हसन ने प्रवर समिति के प्रतिवेदन को शुक्रवार को सदन में रखा। प्रतिवेदन में विधानसभा से पारित हो चुके इस विधेयक को ज्यों का त्यों पारित मान लिया गया है।
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इसके चलते अब प्रमोशन में कोटा खत्म करने और सामान्य व पिछड़े वर्ग के कर्मचारियों व अधिकारियों को पदोन्नति देने के लिए कानून बनने का रास्ता साफ हो गया है। परिषद में बसपा के विरोध के चलते यह दोबारा पारित न हो पाए तो भी कोई असर नहीं पड़ेगा। पिछले सत्र में 26 जून को यह विधेयक परिषद में रखा गया था। बसपा के विरोध के चलते इसे प्रवर समिति के सुपुर्द कर दिया गया था।
 
वैसे तो सपा सरकार ने उसी समय प्रमोशन में आरक्षण को समाप्त करने का अध्यादेश जारी कर दिया था, जब सर्वोच्च न्यायालय से फैसला आया था। फैसले में कहा गया था कि प्रमोशन में आरक्षण के प्रावधान को तभी लागू किया जा सकता है जब सरकार को लगता हो कि इसके बगैर अनुसूचित जातियों का किसी पद या श्रेणी में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है और आरक्षण का लाभ देने से किसी का हित प्रभावित नहीं होगा।
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इस अध्यादेश को विधानसभा से पारित कराकर विधान परिषद की मंजूरी के लिए भेजा गया तो परिषद में बसपा ने अपने बहुमत के बल पर इसे पारित नहीं होने दिया। इससे प्रदेश में कानूनविहीनता की स्थिति पैदा हो गई थी। इसलिए सरकार को पहले वाले अध्यादेश को फिर ज्यों का त्यों जारी कराना पड़ा। इसी अध्यादेश के आधार पर जून से अब तक सामान्य व पिछड़े वर्ग के अफसरों व कर्मचारियों को पदोन्नतियां दी गईं।

यह पदोन्नतियां प्रभावित न होने पाएं, इसके लिए सरकार ने परिषद में पहले ही दिन शुक्रवार को ‘उत्तर प्रदेश लोक सेवा’(अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण) (संशोधन) (द्वितीय) अध्यादेश को सदन में रख दिया। पूर्व संसदीय कार्य मंत्री हृदयनारायण दीक्षित कहते हैं कि अब बसपा के इस विधेयक का विरोध करने पर भी कोई असर नहीं होगा। विधानसभा के दोबारा इस विधेयक को पारित करते ही यह कानून के रूप में अस्तित्व में आ जाएगा।

बसपा करेगी विरोध
बसपा विधानमंडल दल के उपनेता गोपाल नारायण मिश्र का कहना है कि प्रवर समिति में उन्होंने पूरी ताकत से इस विधेयक का विरोध किया। सरकार ने इस प्रतिवेदन को सदन में प्रस्तुत कर दिया है, लेकिन बसपा का दृष्टिकोण यथावत है। बसपा अध्यक्ष मायावती इसके लिए लगातार संघर्ष कर रही हैं। बसपा इसे आसानी से समाप्त नहीं होने देगी। हम सदन में इस पर चर्चा के दौरान फिर विरोध करेंगे।
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