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जनता के पैसों से बना था केजीएमयू

Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
Lucknow
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लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी का 108वां स्थापना दिवस समारोह 24 नवंबर को मनाया जाएगा। इसकी नींव प्रिंस ऑफ वेल्स ने 26 दिसंबर 1905 में रखी थी। इसके बाद 1911 में वहां एमबीबीएस के पहले बैच ने प्रवेश लिया, जिसमें 31 छात्र थे। 108 वर्ष के दौरान इस चिकित्सा संस्थान ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। अब ये संस्थान देश के सबसे अधिक बेड वाले अस्पताल के रूप में जाना जाता है।
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किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज की स्थापना का सपना सन् 1870 में महाराजा विजयनगरम् ने देखा था। उन्होंने मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए तीन लाख रुपये दान देने का प्रस्ताव भी दिया था, लेकिन वित्तीय संसाधनों के अभाव में यह प्रस्ताव यूनाइटेड प्रोविंसन (उत्तर प्रदेश) सरकार ने पारित नहीं किया। इसके बाद सन् 1905 में वेल्स के राजकुमार के भारत भ्रमण की स्मृति आयोजित करने के समय जहांगीराबाद के राजा सर तसुदुक रसूल ने आयोध्या के राजा से आग्रह किया कि वे यूनाइटेड प्रोविंसन के ले. गवर्नर सर जेम्स लाटूश के जरिए भारत सरकार से मेडिकल कॉलेज की स्थापना की संस्तुति करे। इस पर कॉलेज की स्थापना की स्वीकृति तो मिल गई, लेकिन यह भी शर्त रख दी गई कि यूपी की जनता से इसके लिए आठ लाख रुपये एकत्रित कराए जाएं। इसके बाद 26 दिसंबर 1905 को कॉलेज की नींव रखी गई। भारतीय सिरैनिक शैली, नवाबी शहर की मीनारों की मिलीजुली शैली में अस्पताल की बिल्डिंग तैयार हो गई। औपाचारिक रूप से इसका शुभारंभ जॉर्ज पंचम और महारानी मेरी ने भारत आने पर किया था। उस समय सर जॉन प्रेसकॉट हेवेट यूपी केले. गवर्नर थे। अक्टूबर 1911 से यहां 31 छात्रों का पहला बैच शुरू हुआ था। कर्नल डब्लू. सेल्बी मेडिकल कॉलेज के पहले प्रिंसिपल बने। वह सर्जरी के प्रोफेसर भी थे। पांच प्रोफेसर और दो लेक्चरर से यहां पढ़ाई की शुरुआत हुई थी। 1916 में डॉक्टरों का पहला बैच निकला। साथ ही सबसे उत्कृष्ट छात्र को हीवेट पदक दिए जाने की शुरुआत भी हुई। इसी वर्ष यहां 226 बेड का अस्पताल खोला गया, जो किंग जॉर्ज हॉस्पिटल के नाम से जाना गया। 1921 में मेडिकल कॉलेज के प्रशासनिक अधिकार लखनऊ विश्वविद्यालय को दे दिए गए। लविवि परिसर में पहला दीक्षांत समारोह 30 अक्टूबर 1922 को आयोजित किया गया। 1931 में क्वीन मेरी अस्पताल और 1949 में दंत संकाय की शुरुआत की गई। 16 सितंबर 2002 को किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज को छत्रपति शाहूजी महाराज चिकित्सा विश्वविद्यालय नाम दिया गया। यहां के प्रिंसिपल प्रो. केएम सिंह को चिविवि के कुलपति बन गए। इसके बाद 12 मई 2003 को पद्मश्री डॉ. महेंद्र भंडारी को यहां का कुलपति बनाया गया। 12 दिसंबर 2003 को एक बार फिर किंग जॉर्ज एलुमनाई एसोसिएशन की मांग पर सपा सरकार ने सीएसएमएमयू को किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी नाम दिया। 2007 में बसपा सरकार बनने पर इसका नाम फिर बदलकर छत्रपति शाहूजी रख दिया गया, लेकिन मई 2012 में सपा सरकार के आने के बाद फिर चिविवि का नाम किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी कर दिया।
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