Trauma center in name only, patients are not treated
जिलेवासियों की सहूलियत के लिए करोड़ों की लागत से पूरे केशवराय, रानीगंज और लालगंज में ट्रामासेंटर का निर्माण हुआ है। लोकार्पण के बाद भी जिले के लोगों को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा है। जबकि एक-एक ट्रामासेंटर में बीस-बीस कर्मचारियों की तैनाती की गई। इसके बावजूद हादसे में घायल सहित अन्य गंभीर मरीजों को इलाज कराने के लिए प्रयागराज के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
शासन ने सदर के पूरे केशवराय और रानीगंज तहसील के साथ लालगंज में ट्रामासेंटर का निर्माण पांच साल पहले कराया था। एक साल पहले मुख्य चिकित्साधिकारी ने तीनों जगहों पर 20-20 कर्मचारियों की तैनाती की थी। लालगंज में मरीजों के इलाज के नाम पर सिर्फ मरहम-पट्टी की जाती है। पूरेकेशवराय और रानीगंज के ट्रामासेंटर में ताला लटकता रहता है। जिम्मेदार अफसर इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इससे लोगों को ट्रामासेंटर के संचालन से लाभ नहीं मिल रहा है।
यहां तैनात कर्मचारी अपनी सेवा कहा दे रहे हैं, इसके बारे में भी किसी को जानकारी नहीं है। हादसे में घायल मरीजों को लेकर लोग ट्रामासेँटर पहुंचते हैं किसी प्रकार की सुविधाएं नहीं मिलती है। तत्काल सीएचसी भेज दिया जाता है। सीएचसी से रेफर कागज थमा दिया जाता है।
ट्रामा सेंटर के लिए अलग से डॉक्टर अभी नहीं मिले हैं। सीएचसी के चिकित्सकों के सहारे संचालित किया जा रहा है। हादसे में घायलों की जांच के लिए अभी उपकरण नहीं हैं। इसके लिए शासन को पत्राचार किया गया है। डॉ. एसके सिंह, डिप्टी सीएमओ