तीन शुभ योग बन रहा पूजा का मुहूर्त, ऐसे करें पूजन
संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। अखंड सौभाग्य के लिए सुहागिनें भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज का व्रत रखेंगे। बलीपुर दुर्गा मंदिर के पुजारी आलोक मिश्रा के अनुसार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि की शुरुआत रविवार, 17 सितंबर को सुबह 11 बजकर 8 मिनट पर होगी। तिथि का संचरण अगले दिन सोमवार, 18 सितंबर को दोपहर 12.39 बजे होगा। ऐसे में हरतालिका तीज 18 सितंबर को मनाई जाएगी।
परंपरा के अनुसार महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रखेंगी। फिर शाम को चंद्रोदय पर चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत पूरा करेंगी। वहीं कुंवारी लड़कियां भी अच्छे वर की कामना के साथ इस व्रत को रखती हैं। मान्यता है कि इस व्रत को करने से वैवाहिक जीवन सुखमय होता है और पति-पत्नी के बीच आपसी प्रेम बढ़ता है।
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हरतालिका तीज की पूजा विधि
हरतालिका तीज पूजा के लिए मिट्टी से निर्मित भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की मूर्तियां स्थापित की जाती हैं। पीला वस्त्र, केले का पत्ता, जनेऊ, सुपारी, रोली, बेलपत्र, धतूरा, शमी का पत्ता, दूर्वा, कलश, अक्षत, घी, कपूर, गंगाजल, दही, शहद के अतिरिक्त सिंदूर, बिंदिया, मेंहदी, कुमकुम सहित सोलह श्रृंगार का सामान खरीदा जाएगा।
चौकी पर प्रतिमाएं स्थापित करके माता पार्वती को अक्षत, चुनरी, फूल, फल, धूप दीप आदि अर्पित करें। वहीं शिव जी को सफेद चंदन, बिल्वपत्र, भांग, धतूरा आदि अर्पित करें, भगवान शिव को सफेद फूल अर्पित करने चाहिए। भगवान शिव की पूजा करते समय ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें। फिर शिव, पार्वती गणेश को भोग लगाएं।
हरतालिका तीज के पर्व पर बाजारों में भीड़ रही। महिलाओं ने पूजन-अर्चन के लिए मूर्तियां खरीदीं। साथ ही हाथों में मेंहदी लगवाई, साज-श्रृंगार व परिधानों की भी खरीदारी की।