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मेडिकल कॉलेज की बर्न यूनिट बेहाल, मरीज घर से एसी लाकर करा रहे उपचार

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मेडिकल कालेज बर्न वार्ड में गर्मी से परेशान मरीज द्वारा लगाया गया निजी एसी। संवाद - फोटो : PRATAPGARH
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डॉ. सोनेलाल पटेल मेडिकल कॉलेज से संबद्ध राजा प्रताप बहादुर अस्पताल के बन वार्ड में भर्ती मरीज भीषण गर्मी में जलन से तड़प रहे हैं। भीषण गर्मी और उमस से परेशान एक मरीज ने राहत पाने के लिए दो दिन पहले घर से एसी मंगाकर वार्ड में लगवा लिया। अस्पताल प्रशासन इस कदर संवेदनहीन बना था कि मरीजों के लिए कूलर तक की व्यवस्था नहीं की गई थी।
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राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय में करोड़ों की लागत से बर्न यूनिट बनी है। इसके प्रत्येक वार्ड में मरीजों की सहूलियत के लिए एसी लगा है। मगर अस्पताल प्रशासन बर्न यूनिट सेंटर में एचआईवी के मरीजों का इलाज किया जा रहा है। जबकि झुलसे मरीजों को सर्जिकल वार्ड के बगल बर्न वार्ड तैयार कर भर्ती किया जा रहा है। इस वार्ड में सिर्फ दो पंखे लगे हैं। इससे झुलसे मरीज भीषण गर्मी में जलन से तड़प रहे हैं। इस वार्ड में इन दिनों पांच मरीज भर्ती हैं।
शहर के दहिलामऊ निवासी संविदा लाइनमैन दिनेश तीन दिन पहले करंट की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गया था। उसे इसी वार्ड में भर्ती कराया गया। सत्तर प्रतिशत से अधिक झुलसे दिनेेश को भीषण गर्मी के चलते असहनीय पीड़ा हो रही थी। उसकी हालत घरवालों से देखी नहीं जा रही थी। दो दिन पहले परिजनों ने उसे राहत देने के लिए घर से एसी लाकर वार्ड में लगवा दिया।
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संविदा लाइनमैन दिनेश ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में मरीजों से ज्यादा डॉक्टरों और स्टाफ की सुविधाओं का ध्यान रखा जा रहा है। अफसरों के चैंबर में एसी लगे हैं, झुलसे मरीजों को जिस वार्ड में भर्ती किया जा रहा है वहां कूलर तक नहीं है। शिकायत करने पर चिकित्सक रेफर करने की धमकी देते हैं।
इस मामले में सीएमएस डॉक्टर सुरेश सिंह का कहना है कि बर्न वार्ड में एसी की व्यवस्था नहीं है। प्रिंसिपल से बात कर एसी लगवाया जाएगा। मरीज की तरफ से लगवाए गए एसी के बिजली के बिल का भुगतान अस्पताल की तरफ से किया जाएगा।
संविदा लाइनमैन को देखने तक नहीं आए बिजली विभाग के अफसर
संविदा लाइनमैन दिनेश गौड़ तीन दिन पहले मीराभवन इलाके में शटडाउन लेकर बिजली की लाइन ठीक कर रहा था। इस दौरान आपूर्ति बहाल होने के कारण वह करंट की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गया। साथियों ने उसे राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय में भर्ती कराया। विभाग के एक भी जिम्मेदार अफसर उसे देखने के लिए अस्पताल नहीं पहुंचे। आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण संविदा लाइनमैन सही से अपना इलाज नहीं करवा पा रहा है। कुछ लोग चंदा जुटाकर उसका इलाज करवा रहे हैं।
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