आनलाइन खाद वितरण ने पीसीएफ गोदाम प्रभारी (भंडार नायक) की पोल खोल कर रख दी। जिले की साधन सहकारी समितियों पर डीएपी खाद का गहरा संकट है। अधिकांश समितियों पर एक दाना डीएपी नहीं थी। मगर फूलपुर स्थित इफ्को मुख्यालय के रिकार्ड में जिले में 1055 मीट्रिकटन डीएपी उपलब्ध होने का दावा किया जा रहा था। अफसर इफ्को के आंकडे का मिलान करने में जुटे,तो गोदाम प्रभारी के खेल का खुलासा हुआ।
पीसीएफ के गोदाम में किसानों को वितरित करने के लिए आई 21,100 बोरी डीएपी को करोड़ों रुपये में बेचने वाला गोदाम प्रभारी पर शिकंजा कसने में अफसरों को पसीना बहाना पड़ा। दरअसल में पीसीएफ के गोदामों में रिजर्व में 3500 मीट्रिकटन डीएपी रखी गई थी। आठ नवंबर को जिले में संकट गहराने के बाद डीएम ने 172 साधन सहकारी समितियों को खाद भेजने के लिए आवंटन जारी कर दिया।
नौ नवंबर को जिले के कुछ साधन सहकारी पर डीएपी लेकर ट्रक पहुंचे और किसानों को वितरित किया गया। दस नवंबर डाला छठ का अवकाश होने के कारण समितियों पर खाद नहीं भेजी गई। मगर 11 नवंबर को 78 समितियों पर 1055.0 मीट्रिकटन डीएपी कागज पर तो भेजी गई, मगर यह खाद समितियों तक नहीं पहुंची। जिले में खाद के लिए जब समितियों पर बवाल होने की खबरें आने लगी, तो अफसरों ने फूलपुर स्थित इफ्को कार्यालय फोनकर डीएपी की मांग किया।
इफ्को के रिकार्ड में 1055.0 मी ट्रिकटन पीसीएफ के गोदाम में डीएपी डंप होने की बात कही, तो अधिकारी मिलान करने में जुट गए। पीसीएफ ने जिन 78 समितियों पर खाद पहुंचाने का दावा किया जा रहा था। उनसे लिखित रूप में लिया गया कि नवंबर माह में खाद नहीं मिली है।
दरअसल में खाद का वितरण ई-पॉस मशीन से कर दिया गया है। जब तक किसान ई-पॉस मशीन में अपना अगूंठा नहीं लगाएगा, तब तक खाद की बोरी स्टाक में डंप बताएगी। यहीं से सचिव के खेल का खुलासा हुआ। सचिव समितियों पर खाद भेजने का दावा करता रहा, जबकि सचिव ने खाद पहुंचने से इंकार किया। जब अधिकारी सक्रिय हुए तो गोदाम प्रभारी फोन बंद करके फरार हो गया।