ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में कैबिनेट मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह मोती सिंह जिले की सियासत में सबसे बड़े खिलाड़ी के रूप में उभरकर सामने आए हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में मिली करारी हार के बाद हर तरफ भाजपा की किरकिरी के बीच ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में अपने बेटे और भतीजे समेत तीन प्रत्याशियों का निर्विरोध निर्वाचन कराकर उन्होंने काफी हद तक पार्टी की लाज बचा ली है। उधर, कुंडा विधायक राजाभैया और कांग्रेस के दिग्ग्ज नेता प्रमोद तिवारी ने भी अपने इलाके में रुतबा बरकरार रखा है। दोनों नेताओं ने एक-एक ब्लॉक में अपने करीबियों का निर्विरोध निर्वाचन करा लिया है।
कैबिनेट मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह मोती सिंह ने मंगरौरा ब्लॉक से प्रमुख का चुनाव जीतकर सियासत में कदम रखा था। उनकी राजनीति में मंगरौरा ब्लाक हमेशा केंद्रबिंदु में रहा। एक तरह से लंबे समय से इस सीट पर मोती सिंह के परिवार का ही कब्जा रहा है। 1983 में मोती सिंह पहली बार यहां से ब्लॉक प्रमुख बने थे। 1988 में वह दोबारा यहां से निर्विरोध ब्लॉक प्रमुख बने। इसके बाद उनके भतीजे प्रदीप कुमार सिंह बाले चार बार यहां से ब्लॉक प्रमुख रहे। अब मोती सिंह के बेटे राजीव प्रताप सिंह नंदन की भी राजनीतिक पारी का आगाज पिता की सीट से ही हुआ है।
बृहस्पतिवार को उनके विरोध में किसी ने नामांकन नहीं किया। इससे उनका निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया। दूसरी तरफ पट्टी ब्लॉक पर भी लंबे समय तक मंत्री मोती सिंह के परिवार का ही कब्जा रहा है। मोती सिंह के चाचा लालमणि सिंह 1962 से 1983 तक प्रमुख रहे। इसके बाद अब लगातार तीसरी बार मोती सिंह के भतीजे राकेश कुमार सिंह ब्लॉक प्रमुख बने हैं। उनके विरोध में भी किसी ने नामांकन नहीं किया। इसी तरह बेलखरनाथधाम ब्लॉक से मंत्री मोती सिंह के ही करीबी सुशील सिंह निर्विरोध ब्लॉक प्रमुख निर्वाचित हुए हैं। उनके खिलाफ भी किस ने नामांकन नहीं किया।
मंत्री मोती सिंह के विधानसभा क्षेत्र में ब्लॉक प्रमुख की चार में से तीन सीटें बिना लड़ाई के ही भाजपा के खाते में आ गई हैं। अब सबकी नजरें आसपुर देवसरा ब्लॉक पर टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि यहां भाजपा और सपा के बीच कड़ी टक्कर हो सकती है। इस सीट पर भी मंत्री मोती सिंह ने तगड़ी किलेबंदी कर रखी है। अभी तक यह सीट सपा के कब्जे में थी।
उधर, जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह राजाभैया का अपने गढ़ कुंडा व बाबागंज में चार सीटों पर करीब 25 वर्षों से कब्जा रहा है। पिछले चुनाव में कुंडा, बाबागंज, बिहार व कालाकांकर ब्लॉक प्रमुख के पद पर उनके समर्थक निर्विरोध निर्वाचित हुए थे। इस चुनाव में भी राजाभैया का रुतबा कायम रहा। बिहार ब्लाक प्रमुख सीट पर जनसत्ता दल की सुशीला सरोज को वह निर्विरोध निर्वाचित कराने में कामयाब रहे। सपा व भाजपा को इस सीट पर प्रत्याशी नहीं मिले।
कालाकांकर में जोरदार टक्कर की संभावना जताई जा रही है, जबकि बाबागंज व कुंडा ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में दूसरे दलों ने अपने समर्थकों का नामांकन कराया। कांग्रेस के गढ़ माने जाने वाले रामपुर खास विधानसभा में रामपुर संग्रामगढ़, लालगंज व सांगीपुर ब्लॉक आते हैं। तीनों ब्लाकों पर कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी की ही जीत होती रही है।
रामपुर संग्रामगढ़ ब्लाक कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी का गृह ब्लाक है। यहां लंबे समय से कांग्रेस का ही कब्जा रहा है। इस सीट से प्रमोद की बेटी आराधना मिश्रा मोना भी ब्लाक प्रमुख रह चुकी हैं। कांग्रेसी दिग्गज प्रमोद एक बार फिर अपना जलवा दिखाने में कामयाब रहे। उन्होंने अपने गृह ब्लाक में समर्थित प्रत्याशी नीतू सरोज को निर्विरोध निर्वाचित कराकर अपना रुतबा कायम रखा। अब कांग्रेस लालगंज व सांगीपुर ब्लॉक पर कब्जे की तैयारी में जुटी है।पेड़ से गिरकर वृद्ध की मौत