मौसमजनित बीमारियों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। जिले में बुखार पीड़ितों और डेंगू पीड़ितों की भरमार है। कुंडा समेत अन्य ब्लॉक क्षेत्रों में अब तक डेंगू के 170 मरीज मिल चुके हैं, इनमें कुछ का इलाज चल रहा है, वहीं अधिकतर स्वस्थ हो गए हैं। ज्यादातर लोग प्लेटलेट्स कम होने की वजह डेंगू को मान रहे हैं। लिहाजा प्लेटलेट्स कम होने की रिपोर्ट आते ही वह डेंगू का उपचार कराने लगते हैं। प्लेटलेट्स कम होने पर विशेषज्ञ चिकित्सकों का कहना है कि सिर्फ डेंगू संक्रमण से ही प्लेटलेट्स कम नहीं होती है। वायरल बुखार, टाइफाइड समेत अन्य बीमारियों में भी प्लेटलेट्स घटती हैं।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 15 जुलाई से 18 अक्टूबर तक जिले में 170 लोगों में डेंगू संक्रमण की पुष्टि हुई है। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज से लेकर निजी अस्पतालों की ओपीडी में डेंगू के संदिग्ध मरीजों की भीड़ है। डॉ. अनुज चौरसिया ने कहा कि मौसम बदल रहा है। इस वजह से लोग वायरल बुखार के चपेट में आ रहे हैं। बुखार होने और पहले मनमर्जी दवा खरीदकर खाकर प्लेटलेट्स कम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बुखार होने पर चिकित्सकों की सलाह पर ही दवा खाएं। जरुरत पड़ने पर डेंगू की जांच कराएं।
सीएमएस डॉ. सौभाग्य प्रकाश ने बताया कि हर दिन करीब 100 बुखार पीड़ित डेंगू जांच करा रहे हैं। जांच में तीन से चार मरीजों की ही रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है। अन्य मरीजों की प्लेटलेट्स 70 हजार से कम मिलती है, लेकिन उन्हें डेंगू संक्रमण नहीं होता।
मेडिकल कॉलेज के फिजीशियन डॉ. मनोज खत्री के मुताबिक तेज बुखार होने पर प्लेटलेट्स कम हो सकती हैं, लेकिन यह डेंगू संक्रमण का लक्षण नहीं है। उन्होंने कहा कि वायरल बुखार समेत अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीजों में प्लेटलेट्स कम हो जाती हैं। अगर किसी की जांच रिपोर्ट में प्लेटलेट्स की संख्या 70 हजार तक आती है तो घबराने की जरूरत नहीं है।
चिकित्सकों की सलाह है कि पपीता, कीवी समेत अन्य फलों का सेवन करने से प्लेटलेट्स बढ़ने लगती हैं। जिन मरीजों की प्लेटलेट्स कम हो गई हों, उन्हें ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए। नारियल पानी कुछ दिन नियमित पीना चाहिए। लिक्विड डाइट बढ़ाने से प्लेटलेट्स काउंट में सुधार आता है। बुखार पीड़ितों को हरी सब्जी, फल का सेवन करना चाहिए, इससे प्लेटलेट्स बढ़ती है।