BDO became a hindrance in the investigation of the scam of quarter to eight lakhs
जिले के संडवाचंद्रिका विकास खंड की रसूलपुर गुलरहा ग्राम पंचायत में बगैर विकास कार्य कराए ही 7.74 लाख रुपये के घपले की जांच अधिकारियों को सौंपी गई है, लेकिन बीडीओ ही जांच में बाधक बन गए हैं। पत्र लिखने के बाद भी अभिलेख मुहैया नहीं कराने से जांच पूरी नहीं हो पा रही है। संडवाचंद्रिका विकास खंड के रसूलपुर गुलरहा गांव में 23 जून से एक जुलाई के बीच एक संस्था को 7.74 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। यह धनराशि हैंडपंप, खड़ंजा और दिव्यांग शौचालय की मरम्मत में खर्च दिखाई गई है।
गांव के दिलीप कुमार द्विवेदी की शिकायत पर जब जांच नहीं हुई, तो सांसद संगमलाल गुप्ता ने डीएम को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच करने को कहा है। डीएम ने लघु सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता और मत्स्य पालक अधिकारी को जांच करने के लिए नामित किया है। समिति के सदस्य बीडीओ को पत्र लिख रहे हैं, मगर अभिलेख नहीं मिलने से जांच अधर में लटकी हुई है। सहायक अभियंता विक्रमाजीत ने बताया कि डीएम ने रसूलपुर गुलरहा में हुई अनियमितता की जांच करने के लिए पत्र लिखा है। बीडीओ को पत्र लिखने के बाद भी अभी तक अभिलेख नहीं मिले हैं। इससे जांच प्रक्रिया प्रारंभ नहीं हो पाई है।
सूचना नहीं देने पर डीपीआरओ पर पांच हजार रुपये जुर्माना
सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत सूचना मुहैया कराने में फेल होने पर राज्य सूचना आयोग ने डीपीआरओ पर 25,000 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जिले के सांगीपुर इलाके के विनोद कुमार श्रीवास्तव ने जिला पंचायत राज अधिकारी से सूचना मांगी थी। तत्कालीन डीपीआरओ के सूचना नहीं देने पर राज्य सूचना आयोग ने इसे लापरवाही मानते हुए 25,000 का अर्थदंड की सुनाया है। राज्य सूचना आयोग आयुक्त किरण बाला चौधरी ने डीपीआरओ के वेतन से 25,000 रुपये वेतन से काट कर सरकारी कोष में जमा कराने को कहा है। डीपीआरओ रवि शंकर व्दिवेदी ने बताया कि मामला पुराना है। अभी आदेश नहीं आया है। जिसके कार्यकाल का मामला होगा, उसे पत्र लिखकर पूरे मामले से अवगत कराया जाएगा।