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सत्यापन में उलझे मुख्यमंत्री किसान दुर्घटना बीमा योजना के लाभार्थी

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किसान की मौत के बाद आश्रितों के पालन-पोषण के लिए मिलने वाले पांच लाख रुपये के लिए किसानों को अफसरों की परिक्रमा करनी पड़ रही है। जिले की पांचों तहसीलों में आवेदन करने वाले 307 आवेदक सत्यापन के अभाव में योजना के लाभ से वंचित हैं। हालांकि चालू वित्तीय वर्ष में 224 लाभार्थियों के भुगतान का दावा किया जा रहा है।
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योगी सरकार ने किसानों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना शुरू की है। इस योजना के तहत वह लाभार्थी किसान जिसकी सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है, उसे प्रदेश सरकार पांच लाख मुआवजे के तौर पर देती है। विकलांगता की दशा में दो लाख रुपये का भुगतान किया जाता है।
चालू वित्तीय वर्ष में 531 लोगों ने आवेदन किए हैं, इनमें से 307 आवेदक सत्यापन के अभाव में भटक रहे हैं, जबकि 224 लाभार्थियों के खाते में ऑनलाइन धनराशि का भुगतान किया गया है। कुंडा, पट्टी, सदर, लालगंज और रानीगंज के किसान अपनी-अपनी तहसील में आवेदन करते हैं। तहसीलों से ही सत्यापन की कार्रवाई होती है, अगर सब कुछ ठीक रहता है, तो आश्रितों को पांच लाख रुपये का भुगतान किया जाता है।
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कोरोना संक्रमण काल के दौरान बड़ी संख्या में किसानों की मौत होेने के बाद आवेदकों की संख्या में अप्रत्याशित बढ़ोत्तरी हुई है। इसके पूर्व एक प्राइवेट कंपनी को बीमा भुगतान की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, मगर व्यापक स्तर पर गड़बड़ी मिलने पर कंपनी को ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया है।
45 दिन के अंदर करना होता है आवेदन
मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा योजना के तहत आवेदन करने के लिए 45 दिन का समय दिया गया है। पहले तीस दिन का समय दिया गया था, मगर बाद में इसे बढ़ाकर 45 दिन कर दिया गया। इससे किसानों की राह काफी आसान हो गई है।
मुख्यमंत्री कृषक बीमा दुर्घटना योजना के तहत जो आवेदन आए हैं, उसकी जांच कराई जा रही है। जो लोग पात्र हैं, उनके खाते में धनराशि भेजी जा रही है। इंद्र भूषण वर्मा, मुख्य राजस्व अधिकारी
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