शहर के बांसुरी चौराहे पर पहुंचे रालोद अध्यक्ष जयंती चौधरी। संवाद
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पीलीभीत। लखीमपुर में मृत किसानों की अंतिम अरदास को लेकर किसानों और नेताओं का जनपद की सीमा से होकर गुजरने की सिलसिला सोमवार से ही शुरू हो गया। जिले में शांति व्यवस्था को लेकर एक दिन पहले ही अलर्ट घोषित कर दिया गया था। मंगलवार को सुबह ही बांसुरी चौराहे पर सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ सिटी के नेतृत्व में फोर्स तैनात कर दी गई थी।
तिकुनिया में मारे गए किसानों को किसान संगठनों अंतिम अरदास पर न्याय दिलाने के लिए सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन का एलान किया था। इसको लेकर प्रशासन ने शांति व्यवस्था को कायम रखने के लिए तैयारियां शुरू कर दी थीं। सोमवार को जिले में अलर्ट घोषित कर दिया था। पांच जोन और 15 सेक्टरों में जनपद को बांटा गया था। बड़ी संख्या में मजिस्ट्रेटों के साथ फोर्स को तैनात किया गया था। शहर के बांसुरी चौराहे पर सिटी मजिस्ट्रेट अरुण कुमार के नेतृत्व में फोर्स को तैनात किया गया था। बांसुरी चौराहे पर पूरनपुर होते हुए लखीमपुर को जाने वाले हाईवे को आधा बंद करा दिया गया था। पुलिस फोर्स चौराहे पर गाड़ियों की चेकिंग करने के बाद ही आगे जाने दिया जा रहा था। दिन भर यह सिलसिला चलता रहा। एएसपी डॉ. पवित्र मोहन त्रिपाठी ने भी चौराहे पर पहुंचकर शांति व्यवस्था का जायजा लिया। हालांकि किसी भी नेता या किसान नेता की गाड़ी को रोका नहीं गया। इधर, दिन भर डीएम-एसपी व्यवस्थाओं का जायजा लेते रहे।
जयंती चौधरी ने कहा- किसानों नहीं मिला अभी इंसाफ, घूम रहे मंत्री
लखीमपुर जाते समय जयंती चौधरी की काफिला बांसुरी चौराहे पर पहुंचा, तो पुलिस सकते में आ गई। इससे पहले उनका काफिला बरेली में रोका गया था। पीलीभीत में पत्रकारों के सवाल पर कहा कि मारे गए किसानों को अभी इंसाफ नहीं मिला है। मंत्री खुलेआम घूम रहे हैं। कभी नहीं देखा कि इतने संगीन अपराध के आरोपी घर में हों। उन्होंने कहा कि उन्हें एक घंटा बरेली एयरपोर्ट पर रोका गया। मैं नहीं समझ पाया कि क्यों रोका जा रहा है, क्या मेरे खिलाफ कोई 302 और दंगा भड़काने का मुकदमा है। देश के किसी थाने में मेरे खिलाफ कोई मुकदमा नहीं है। इसके बाद भी पुलिस मुझे बंदी बनाना चाहती है। जब तक न्याय नहीं मिलेगा, तब तक लोग आंदोलन करेंगे। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री की बर्खास्तगी और गिरफ्तारी होनी चाहिए। ताकि किसान परिवारों को न्याय मिल सके।