उत्तर प्रदेश के छात्रों को तकनीकी शिक्षा में आगे बढ़ाने की सरकार की मुहिम को छात्र ही पलीता लगा रहे हैं। ये छात्र शासन से मिले लैपटॉप को बेचने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं।
लैपटॉप बेचने के लिए ओएलएक्स की साइट को नया तरीका बनाया है, जिस पर विज्ञापन पोस्ट किए गए हैं। पिछले दिनों तक छात्र अपने परिचितों या दोस्तों के माध्यम से लैपटॉप बेच रहे थे लेकिन अब इसके लिए तकनीक का सहारा ले रहे हैं।
लैपटॉप बेचने के इच्छुक छात्रों ने इसके लिए ओएलएक्स की साइट पर विज्ञापन डाले हैं। जहां इनकी कीमत 4 से 8 हजार रुपये रखी गई है।
शुक्रवार को देवरिया के छात्र की ओर से महज 3,500 रुपये में लैपटॉप बेचने के लिए डाला गया विज्ञापन दिखा। वहीं, दूसरी ओर इन्हें खरीदने के इच्छुक लोगों ने भी इसी साइट पर विज्ञापन डाल रखे हैं।
छह से आठ हजार तक में खरीदने की इच्छा जताई है। इस संबंध में कानपुर के एक छात्र अजय से बात की तो उसने बताया कि वह आठ हजार रुपये में साइट के माध्यम से लैपटॉप बेच चुका है।
वहीं वाराणसी के खरीदार ने विज्ञापन में लिखा है कि उन्हें अखिलेश का लैपटॉप चाहिए, आठ हजार रुपये तक में। इसके अलावा कानपुर, फर्रुखाबाद, आगरा और नोएडा के लोगों ने भी खरीदने और बेचने के लिए विज्ञापन डाले हैं।
अमर उजाला ने छापी थी खबर
शासन की ओर से दिए गए लैपटॉप छात्रों द्वारा बेचने के संबंध में अमर उजाला ने 4 जून को ‘लैपटॉप की खातिर शुरू हो गए खेल’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी।
इसमें बताया गया था कि छात्रों ने किन हथकंडों को अपनाकर लैपटॉप लिया है। साथ ही लैपटॉप मिलते ही दुकानों पर बेचने भी पहुंच गए।
इसके अलावा शासन के लैपटॉप की खामियों के संबंध में ‘अखिलेश के लैपटॉप को लगा रोग’, ‘कितने काम का है अखिलेश का लैपटॉप’ और ‘सरकारी लैपटॉप-दस सवाल दस जवाब’ आदि खबरें प्रकाशित की थीं।