मेरठ में युवती से गैंगरेप और धर्म परिवर्तन के मामले में मंगलवार को एक नया खुलासा सामने आया। पुलिस के मुताबिक आरोपी हाफिज और उसके साथी युवती को विदेश भेजना चाहते थे। युवती का पासपोर्ट बनवाने के लिए उन्होंने पुलिस ऑफिस में एक प्रार्थना पत्र भी लगाया था।
गैंगरेप और धर्म परिवर्तन कराने के बाद पीड़ित युवती को हाफिज देवबंद स्थित एक मदरसे में छोड़ आया था। आरोपी हाफिज का अगला प्लान युवती को विदेश भेजने का था। यह जानकारी युवती को भी हो चुकी थी। पुलिस सूत्रों की मानें तो आरोपी आठ लड़कियों को धर्म परिवर्तन कराकर विदेश भेज चुके हैं। भाजपा, हिंदू संगठन और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को इसकी जानकारी लगी तो उनका गुस्सा और भड़क गया।
भाजपा नेताओं ने इसकी शिकायत डीआईजी से करते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। डीआईजी के. सत्यानारायणा ने बताया कि ऐसी शिकायत उनके पास आई थी। पुलिस ऑफिस में आरोपियों का प्रार्थना पत्र तलाश किया, लेकिन कुछ नहीं मिला। मामले की जांच कर कार्रवाई करेंगे।
आरोपियों पर लगेगी रासुका
डीआईजी ने बताया कि हाफिज, ग्राम प्रधान नवाब और अन्य आरोपियों पर रासुका लगाई जाएगी। पुलिस की तीन टीमें हाफिज की तलाश में लगी हैं। हाफिज की गिरफ्तारी के बाद इस वारदात में कई और खुलासे हो सकते है।
तनावपूर्ण माहौल के बीच हुए युवती के बयान
अपहरण के बाद एक मदरसे में गैंगरेप और जबरन धर्म परिवर्तन की शिकार पीड़ित युवती के मंगलवार को तनावपूर्ण माहौल के बीच बयान दर्ज हुए। अपर सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की कोर्ट में बयान के दौरान हिंदू संगठन और भाजपाइयों ने नारेबाजी के साथ हंगामा प्रदर्शन किया। उधर, सांप्रदायिक तनाव की आशंका के चलते एक समुदाय के कई लोगों ने अपने परिवार की महिलाओं और बच्चों को गांव से बाहर भेज दिया है। दोपहर में कमिश्नर भूपेंद्र सिंह और डीआईजी के. सत्यनारायणा भी गांव पहुंचे। पीड़ित परिवार से बातचीत के साथ ही सुरक्षा का जायजा लिया। वहीं शाम को भाजपा प्रदेशाध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजयेपी ने भी गांव पहुंचकर पीड़िता के परिजनों से मुलाकात की।
खरखौदा थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली युवती का 23 जुलाई को बहला फुसालकर अपहरण किया गया। हापुड़ स्थित मदरसे में गैंगरेप और मुजफ्फरनगर सहित कई स्थानों पर बंधक बनाकर रखा और इसक बाद जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया। 3 अगस्त को बंधनमुक्त होकर युवती घर लौटी। उसके पिता ने ग्राम प्रधान नवाब, मदरसा के संचालक सनाउल्ला, शमरजहां पत्नी सनाउल्ला, निशात पुत्री हसमत और हापुड़ निवासी हाफिज जी समेत चार अज्ञात आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। नामजद आरोपियों में से नवाब, शमरजहां और निशात को गिरफ्तार कर सोमवार दोपहर जेल भेज दिया गया है।
मंगलवार दोपहर 2 बजे युवती को बयान दर्ज करने के लिए कचहरी लाया गया, तो बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद और भाजपा कार्यकर्ताओं की भीड़ लग गई। कोर्ट के बाहर ही नारेबाजी और हंगामा प्रदर्शन किया। आरोपियों को फांसी दिलाने की मांग की। गांव में पुलिस और पीएसी का पहरा है, फिर भी दहशत का माहौल बना हुआ है। दंगे की आशंका से लोग डरे सहमे हैं। इसी कारण एक समुदाय के कुछ परिवारों ने महिलाओं और बच्चों को गांव से बाहर रिश्तेदारियों में भेज दिया।
वहीं सोमवार रात खरखौदा में कुछ उत्पाती लोगों ने बस में तोड़फोड़ की कोशिश की, जबकि सड़क किनारे रखे दो खोखो में आग लगाई। मौके पर पहुंची पुलिस ने आग को बुझाया। इन घटनाओं की वजह से तनाव और बढ़ गया है। डीआईजी के. सत्यनारायणा ने बताया कि गांव और खरखौदा में कड़ी सुरक्षा बरती जा रही है। उन्होंने युवती से दुष्कर्म होने की पुन: पुष्टि की है, जबकि एडीजी मुकुल गोयल ने दुष्कर्म न होने का बयान दिया।
बयानों में उलझा बलात्कार
खरखौदा थाना क्षेत्र की युवती से धर्म परिवर्तन और गैंगरेप का मामला पुलिस अफसरों के बयानों ने उलझा दिया है। अफसरों के बयानों में मतभेद सामने आ रहा है। मामले को लेकर एडीजी (कानून व्यवस्था) मुकुल गोयल ने सोमवार को कहा था कि युवती का धर्म परिवर्तन तो हुआ, लेकिन उससे रेप नहीं। जबकि डीआईजी रेंज के. सत्यनारायणा ने मंगलवार को जानकारी दी कि धर्म परिवर्तन के साथ ही सामूहिक दुष्कर्म भी हुआ है। खास बात यह है कि खुद युवती ने अपने मेडिकल के दौरान दुष्कर्म होने की जानकारी दी थी।
नहीं निकाला कोई अंग: आईजी
डीआईजी रेंज के. सत्यनारायणा ने बताया कि युवती का ऑपरेशन करने के दौरान शरीर से नली निकाली गई। वहीं, आईजी जोन आलोक शर्मा का कहना है कि युवती के शरीर से कोई अंग नहीं निकाला गया। उन्होंने धर्मांतरण के मामले को संवेदनशील बताते हुए कहा कि इसकी गहनता से जांच हो रही है।
यह बोली थी युवती
घटना वाले दिन दोपहर 2 बजे उसे हापुड़ कॉलेज से आते समय हाफिज जी ने धोखे से उसे गाड़ी में बैठा लिया। बोली कि मैं उन्हें जानती भी हूं। बताया कि गाड़ी में एक और लड़का था। फिर उसे खेत ले जाकर कुछ सुंघाने के बाद उससे बलात्कार किया गया। फिर शाम करीब 5 बजे तहसील के पास छोड़ दिया।
सहेली की मदद ने दिया जिंदगी भर का दर्द
अपने दम पर पढ़कर आगे बढ़ने का सपना देखने वाली युवती ने जिससे मदद मांगी, उसी से दगा मिला। महज 15 सौ रुपये मासिक वेतन पर उसने मदरसे में नौकरी की। लेकिन इसकी उसे भारी कीमत चुकानी पड़ी। पुलिस विवेचना में युवती की कॉलेज लाइफ से लेकर आखिर तक हुए घटनाक्रम को जोड़कर चल रही है।
एसएसपी ओंकार सिंह के अनुसार थाना खरखौदा पर दर्ज केस की प्रारंभिक विवेचना में कई चौंकाने वाले पहलू सामने आ रहे हैं। हापुड़ के एक कॉलेज में बीए तृतीय वर्ष की इस छात्रा को मदरसे में नौकरी सहेली निशात की मदद से मिली थी। विवेचना के अनुसार युवती के साथ 29 जून को दुष्कर्म किया गया। सामाजिक बदनामी और जान के डर से उसने 3 अगस्त को इसकी जानकारी अपनी बहन को दी।
इस विवेचना का मुख्य पार्ट युवती का धर्मांतरण होना भी है। पुलिस उस शपथपत्र की फोरेंसिक जांच कराने जा रही है, जिसमें युवती द्वारा इस्लाम कबूल करने की बात कही गई। एसएसपी का कहना है कि इस शपथपत्र पर दर्ज युवती के हस्ताक्षरों का मिलान किया जा रहा है। इसके बाद ही आधिकारिक रूप से कहा जा सकेगा कि युवती से डरा धमकाकर हस्ताक्षर कराए गए या फिर फर्जी तरीके से हस्ताक्षर कर दिए गए।
एसएसपी ओंकार सिंह का कहना है कि परिस्थितियां चाहें जो भी और जैसी भी रही हों, लेकिन युवती के साथ अन्याय हुआ है। उसके साथ दुष्कर्म हुआ। मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना भी सहनी पड़ी। पुलिस एक भाई या पिता होने के नाते इस पीड़ा को समझती है। पीड़ित युवती को हर हाल में न्याय दिलाया जाएगा।
युवती के बयानों के आधार पर हो रही है जांच-पड़ताल
मेरठ के खरखौदा निवासी युवती को धर्मांतरण के बाद स्थानीय मदरसे में रखे जाने के बाद अब उसका ऑपरेशन भी यहीं के निजी नर्सिंगहोम में कराए जाने की आशंका जताई जा रही है। आशंका के मद्देनजर पुलिस गोपनीय रूप से उसके बयानों की तस्दीक कर रही है। कई चर्चित नर्सिंगहोम भी जांच के दायरे में हैं।
तीन दिन पूर्व खरखौदा थाने में पहुंची युवती ने जबरन धर्मांतरण कराने के बाद मदरसे में बंधक बनाकर रखने की बात कही थी। इसकी जानकारी पर पुलिस ने शहर के मुस्तफा कॉलोनी स्थित मदरसे में पहुंचकर जांच भी की थी, लेकिन वहां कुछ हाथ नहीं लगा।
भी तक की तफ्तीश में सामने आया है कि युवती का गर्भाशय निकाले जाने के लिए उसका ऑपरेशन भी शहर के ही किसी हॉस्पिटल में हुआ है। ऐसे में स्थानीय पुलिस लगातार मेरठ पुलिस के संपर्क में है। हालांकि अफसर यहां से घटना का लिंक होने की कम उम्मीद जाहिर कर रहे हैं। स्थानीय पुलिस का कहना है कि मेरठ पुलिस को जांच में सहयोग किया जा रहा है।
मामले की हो निष्पक्ष जांच: उलेमा
खरखौदा के एक मदरसे में युवती से गैंगरेप और धर्मपरिवर्तन कराने के मामले में दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर ने कहा कि जब तक पुलिस की जांच पूरी तरह से सामने नहीं आ जाती इस पर कुछ कहना जल्दबाजी होगा।
मंगलवार को मौलाना नसीम अख्तर शाह ने खरखौदा प्रकरण पर कहा कि यदि घटना में जरा भी सच्चाई है तो इसके गुनाहगारों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। युवती ने अभी अदालत में बयान दर्ज कराए हैं। इसलिए इस पर कुछ भी नहीं कहा जा सकता। पुलिस की जांच के बाद ही सच्चाई से पर्दा उठेगा। मौलाना ने घटना की निंदा करते हुए पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष की जांच कर सच्चाई सामने लाने की मांग की है। मौलाना नदीमुलवाजदी ने भी घटना को अफसोशजनक बताते हुए इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की है।
'बहन के सम्मान में, भाई हैं मैदान में'
कचहरी में मंगलवार दोपहर जब युवती को बयान दर्ज कराने के लिए लाया गया, उससे पहले ही काफी लोग कोर्ट के बाहर एकत्र हो चुके थे। हंगामे के मद्देनजर तीन थानों की पुलिस और पीएसी के जवानों ने कचहरी में मोर्चा संभाला।
दोपहर करीब 2 बजे युवती को कोर्ट में पेश किया गया। करीब एक घंटा तक युवती कोर्ट के भीतर रही। पीड़ित युवती से मजिस्ट्रेट नीतू यादव ने कमरे में बयान दर्ज किए। इस दौरान भाजपा नेता डॉक्टर मुकेश परमार, भाजपा जिला उपाध्यक्ष अजित सिंह, बजरंग दल कार्यकर्ता इंद्रपाल बजरंगी, भाजयुमो नेता वरुण गोयल और हिंदू संगठन की पदाधिकारी चेतना शर्मा के अलावा खरखौदा क्षेत्र के 100 से ज्यादा लोग कोर्ट के बाहर जमे रहे।
बयान दर्ज होने के बाद युवती को कोर्ट से बाहर ले जाने में पुलिस ने चतुराई दिखाई। लोगों को गुमराह करते हुए कोर्ट के पिछले दरवाजे की तरफ पुलिस की जीप लगवा दी। बयान दर्ज होते ही मुख्य दरवाजे से युवती को लेकर पुलिस कचहरी से बाहर निकली, तो युवक पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जीप के पीछे-पीछे चले। इससे कचहरी में तनातनी का माहौल बना रहा।
हंगामा प्रदर्शन पर नाराज हुईं मजिस्ट्रेट
कुछ युवकों के हाथ में पोस्टर थे, जिन पर बहन के सम्मान में, भाई हैं मैदान में और दुष्कर्मी को फांसी दो के नारे लिखे हुए थे। इन युवकों ने कोर्ट के पिछली तरफ दरवाजे पर खड़े होकर हिंदू संगठन जिंदाबाद और पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद के नारे लगाए। वहीं, पास की दूसरी कोर्ट में मजिस्ट्रेट एक पीड़ित महिला के बयान दर्ज कर रही थीं। उन्होंने दरवाजा खुलवाकर नारेबाजी और हंगामा कर रहे युवकों को देख पुलिसकर्मियों से कहा, इन्हें रोकते क्यों नहीं हो।
पुलिस से भिड़े युवक
महिला थानाध्यक्ष अलका सिंह, इंस्पेक्टर सिविल लाइन आलोक सिंह और एसओ नौचंदी विनोद कुमार सिंह फोर्स के साथ कचहरी में युवती की सुरक्षा में आए। युवती को कोर्ट के भीतर ले जाते समय युवक भी अंदर घुसने लगे। एसओ नौचंदी ने युवकों को रोकना चाहा, तो गरमागरमी हो गई। वहीं, सोमवार को पीड़िता की तरफ से वकील अजय त्यागी ने पैरवी की, मगर मंगलवार को केस वकील प्रमोद त्यागी को सौंप दिया गया। अजय त्यागी भी मंगलवार दोपहर कोर्ट पहुंचे, तो पीड़िता के बहनोई से किसी बात पर उनकी बहस हो गई।
'बहन-बेटियों की इज्जत को सांप्रदायिकता से जोड़ना कायरता'
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने मंगलवार शाम करीब 7 बजे गांव पहुंचकर पीड़ित युवती और उसके परिजनों से बात की। वाजपेयी ने परिवार को भरोसा दिलाया कि भाजपा पूरी तरह उनके साथ है। वहीं वाजपेयी ने विपक्षियों के इस आरोप को कि भाजपा प्रदेश में सांप्रदायिकता फैलाना चाहती है, पर कहा कि बहन बेटियों की इज्जत को सांप्रदायिकता से जोड़ना कायरता है। यदि यह सांप्रदायिकता है तो हां भाजपा सांप्रदायिक है।
परिजनों ने प्रदेश अध्यक्ष को बताया कि उन्हें धमकियां मिल रही हैं। इस पर वाजपेयी ने कहा कि डरने की जरूरत नहीं है। पूरी भाजपा आपके साथ है। कहा कि सिर्फ युवती और परिवार को न्याय के लिए डटे रहना है बाकी काम हम कर लेंगे। इसके बाद मीडिया से बात करते हुए डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कहा कि घटना के खुलासे के बाद साफ हो गया है कि साजिश के तहत धर्मांतरण का काम चल रहा है। कहा कि इस घटना की जांच एसटीएफ से कराने की मांग करेंगे, ताकि सिर्फ इसी घटना का नहीं, बल्कि इसके पीछे जो शातिर गिरोह है उसका पर्दाफाश हो सके।
वाजपेयी ने कहा कांठ, सहारनपुर और अब इस घटना को एक साथ जोड़कर विपक्ष भाजपा पर सांप्रदायिकता का आरोप लगा रहा है। ऐसे लोग कायर हैं, जो बहन बेटियों की इज्जत को भी सांप्रदायिकता से जोड़कर देख रहे हैं। यदि बेटियों की इज्जत बचाने की आवाज उठाना सांप्रदायिकता है तो वह और भाजपा सांप्रदायिक हैं। लेकिन अब प्रदेश में नियोजित अपराधों की अति हो चुकी है। जिसे भाजपा बर्दाश्त नहीं करेगी।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि डीएम इसे गैंग रेप नहीं रेप बता रहे हैं। यह बयान बहुत ही हास्यास्पद है। भाजपा ने इस घटना को लेकर 10 बिंदु तैयार किए हैं, जिस पर प्रशासन से हिसाब मांगा जाएगा। पुलिस कार्रवाई पर उन्होंने कहा कि संतोषजनक कही जा सकती है।
मदरसा प्रकरण में भड़का गुस्सा
मेरठ के खरखौदा की युवती को अगवा कर उसका धर्मांतरण कराए जाने के मामले में मंगलवार को भाजपा महिला मोर्चा ने शिवचौक पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया। अफसरों को ज्ञापन के साथ चूड़ियां भी भेंट की गईं। उधर, शिवसेना कार्यकर्ताओं ने भी जुलूस निकालकर डीएम ऑफिस पर प्रदर्शन किया।
भाजपा महिला कार्यकत्रियों ने मंगलवार दोपहर शिवचौक पर मानव श्रंखला बनाकर जाम लगा दिया। कार्यकत्रियों ने मेरठ के खरखौदा निवासी युवती को शहर के मदरसे में बंधक बनाकर रखे जाने के मामले में पुलिस पर ठोस कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया। इसके अलावा, जिले में बढ़ रहे अपराधों पर नियंत्रण नहीं हो पाने के लिए भी पुलिस-प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया। जाम लगते ही लोगों की परेशानी को देखते हुए पुलिस ने यातायात डायवर्ट कर दिया। सूचना पर सीओ नई मंडी योगेंद्र सिंह और सीओ इंस्पेक्टर सिंह ने मौके पर पहुंचकर कार्यकत्रियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने अफसरों को बुलाने की मांग की।
बाद में पहुंचे एसपी सिटी श्रवण कुमार को महिलाओं ने ज्ञापन और महिला इंस्पेक्टर मीनाक्षी को चूड़ियां भेंट कर मदरसा प्रकरण की सही जांच कर आरोपियों की खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने और अपराधों पर नियंत्रण लगाने की मांग की।