एक-एक कर बिखर गया बसपा का कुनबा
मुजफ्फरनगर। एक दशक पूर्व जिले में सबसे मजबूत मानी जाने वाली बसपा का कुनबा एक-एक कर बिखर गया है। बसपा के सभी पूर्व सांसद और पूर्व विधायक पार्टी को अलविदा कह चुके हैं। केवल कादिर राना बचे थे, वह भी सपा के साथ जा रहे हैं। अधिकतर बसपा नेता रालोद, सपा और भाजपा में शामिल हुए हैं।
बहुजन समाज पार्टी जिले में 2007 व 2012 के विधानसभा चुनाव और 2009 के लोकसभा चुनाव में मजबूती के साथ उभरी थी। 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा की आंधी में उड़ने वाली पार्टियों में बसपा भी शामिल हैं। 2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने तीन विधानसभा सीट जीती। जानसठ से यशवंत सिंह, खतौली से योगराज सिंह, चरथावल से अनिल कुमार चुनाव जीते। 2012 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश में सपा की सरकार आई, लेकिन जिले की छह में से तीन विधानसभा सीटों मीरापुर, चरथावल और पुरकाजी में बसपा का कब्जा रहा। मीरापुर से मौलाना जमील, चरथावल से नूरसलीम राना और पुरकाजी से अनिल कुमार विधायक बने। इस बीच 2009 के लोकसभा चुनाव में कादिर राना सांसद बने, लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव में पार्टी का सुपड़ा साफ हो गया। सभी सीटों पर भाजपा जीत गई।
बदलते राजनीतिक समीकरण में ऐेसे हालात बने हैं कि एक-एक कर बसपा के सभी नेता पार्टी छोड़ गए हैं। जिले में बसपा के मजबूत स्तंभ कहे जाने वाले पूर्व विधायक अनिल कुमार, पूर्व सांसद राजपाल सैनी, राकेश शर्मा पहले ही सपा का दामन थाम चुके हैं। इनके अलावा पूर्व विधायक नूरसलीम राना, पूर्व सांसद अमीर आलम खान, पूर्व विधायक नवाजिश आलम, पूर्व विधायक मौलाना जमील, पूर्व मंत्री योगराज सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष कमल गौतम, अभिषेक चौधरी बसपा छोड़ रालोद में शामिल हो चुके हैं। पूर्व मंत्री यशवंत सिंह, प्रदीप सैनी, तेजपाल सैनी, अनूप सैनी, अरविंद राज शर्मा, सूरत सिंह वर्मा भाजपा की सदस्यता ले चुके हैं। पूर्व में चुनाव जीते पूर्व सांसद, पूर्व विधायक और बसपा से चुनाव लड़ चुके सभी नेता एक-एक कर पार्टी छोड़ चुके हैं। ऐसे हालात में 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा के लिए चुनौती नजर आ रही है, क्योंकि उसे अब यहां नए चेहरों पर दांव लगाना होगा।