देवबंद (सहारनपुर)। थीतकी गांव के जंगल में पुलिस छापामारी के दौरान गोली लगने से हुई शिया समुदाय के जीशान की मौत के मामले में मृतक परिजनों की मांग पर मुजफ्फरनगर एसपी सिटी को जांच हस्तांतरित किया गया है। वहीं, सहारनपुर क्राइम ब्रांच भी मामले की जांच कर रही है। मृतक के परिजनों ने पुलिस पर जीशान की हत्या करने का आरोप लगाया था।
कोतवाली पुलिस ने पांच सितंबर की रात्रि गोकशी की सूचना पर थीतकी गांव के जंगल में छापामारी की थी। इस दौरान गांव निवासी जीशान संदिग्ध परिस्थितियों में पैर में गोली लगने से घायल हो गया था। जिसकी उपचार के दौरान मौत हो गई थी। पुलिस का कहना है कि भागते समय स्वयं के हाथ में लिए तमंचे से चली गोली जीशान के पैर में लगी और दहशत के चलते उसकी मौत हुई थी, जबकि मृतक की पत्नी अफरोज ने तीन उपनिरीक्षकों सहित 13 पुलिसकर्मियों पर पति की हत्या करने का आरोप लगाते हुए एसएसपी को प्रार्थना पत्र दिया था। इतना ही नहीं मृतक के चचेरे भाई व सपा सरकार में दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री रहे सैयद ईसा रजा इस मामले को लखनऊ तक ले गए थे। जिसके बाद मामले की जांच के आदेश हुए थे। बृहस्पतिवार को ईसा रजा ने बताया कि पीड़ित परिजनों की मांग पर मामले की जांच एसपी सिटी मुजफ्फरनगर अर्पित विजयवर्गी को सौंपी गई है। जिन्होंने जांच शुरू कर दी है। वहीं, सहारनपुर क्राइम ब्रांच भी पूरे मामले की जांच कर रही है।
पुलिस ने बनाई गोकशी की मनगढ़ंत कहानी: रजा
देवबंद। मृतक जीशान की पत्नी अफरोज ने एसएसपी को दिए प्रार्थना पत्र में बताया था कि पांच सितंबर की रात्रि पुलिस उसके पति जीशान को घर से बुलाकर ले गई थी। जिसके बारे में जीशान ने फोन कर जानकारी दी थी। काफी देर बाद फोन किया गया तो नंबर बंद मिला। सवेरे दो पुलिसकर्मी घर पहुंचे और जीशान की मौत की जानकारी दी। सपा शासन में दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री रहे सैयद ईसा रजा ने बताया कि मृतक जीशान करीब 40 बीघा जमीन का मालिक है तथा उसके पास लाइसेंसी रायफल व बंदूक भी है। ऐसे में पुलिस का मनगढ़ंत कहानी बनाकर उस पर गोकशी करने का आरोप लगाना सरासर गलत है।