मुजफ्फरनगर में छह साल पहले लूट के बाद सिपाही रमन कुमार की गोली मारकर हत्या करने के मामले में दो हत्यारोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या-11 शाकिर हसन ने फैसला सुनाया। सिपाही बिजनौर से शामली लौट रहा था। उसी समय वारदात को अंजाम दिया गया था।
सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी नीरज कांत मलिक ने बताया कि शामली के सिंभालका गांव निवासी यूपी पुलिस में सिपाही रमन कुमार बिजनौर पुलिस लाइन में तैनात था। 13 जनवरी, 2016 को वह बिजनौर से बाइक द्वारा घर के लिए चला था। शाम साढ़े चार बजे सिपाही ने परिजनों को मुजफ्फरनगर होने की बात कही थी, लेकिन साढ़े पांच बजे के बाद वह लापता हो गया और लोकेशन नहीं मिली। परिजनों ने रातभर तलाश की थी। वहीं 14 जनवरी को तितावी थाना क्षेत्र के बुड़ीना कलां गांव स्थित ईख के खेत में सिपाही का शव मिला। मृतक के चाचा संजीव कुमार ने मुकदमा दर्ज कराया था।
पुलिस ने हैदरनगर निवासी डेनिस बालियान और रवि उर्फ विचित्र को गिरफ्तार कर बाइक, मोबाइल और लूटा गया अन्य सामान बरामद किया। लूट का विरोध करने पर सिपाही की हत्या की गई थी। दोनों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। प्रकरण की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या-11 शाकिर हसन ने की।
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बता दें कि अभियुक्तों को धारा 302 में उम्रकैद और 10-10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। धारा 201 में तीन साल की सजा और तीन हजार रुपये अर्थदंड, धारा 394 में 10 साल की सजा और पांच हजार रुपये अर्थदंड, धारा 411 में तीन साल की सजा और तीन हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। अभियुक्त डेनिस और रवि को आयुध अधिनियम में तीन-तीन साल की सजा सुनाई। इसके साथ तीन-तीन हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया गया।
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