मुस्लिमों के हाथ पतंग की डोर थमाने की बेताबी
मुजफ्फरनगर। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी अपनी पतंग की डोर मुस्लिमों के हाथ में थमाने के लिए बेताब दिखे। जिले में सियासत के पहले कदम पर ही राजनीतिक दलों, अलग-अलग जातियों का जिक्र छेड़ा गया। मुजफ्फरनगर दंगे के जख्म भी कुरेदे गए। विपक्षी दलों पर सियासी प्रहार कर मुस्लिमों को अपने पक्ष में करने की जुगत भिड़ाई। विधानसभा चुनाव में नई सियासत के सपने भी खूब दिखाए।
विधानसभा चुनाव से पहले जनपद में ओवैसी की पहली सभा से ही मुस्लिम मतदाताओं को साधने की बेताबी नजर आई। सम्मेलन में उन्होंने मुस्लिमों को लुभाने में कोई कोर कसर बाकी भी नहीं रखी। युवाओं की भावनाओं को खूब झकझोरा। मुजफ्फरनगर दंगे, भारत-पाक क्रिकेट मैच, संसद, एनपीआर, एनआरसी और त्रिपुरा में धर्म स्थलों को गिराने का मुद्दा भी उछाला। पिछले तीन चुनाव की सियासत और नतीजे भी मुस्लिम समाज के लोगों को याद दिलाए।
इस तरह दिया जाटों का उदाहरण
ओवैसी ने कहा कि जाट समाज रालोद से जुड़ा था, लेकिन 2019 के चुनाव में अजित सिंह को हराने के लिए भाजपा को वोट दिया। मुस्लिमों से आह्वान किया कि उन्हें भी रवायत तोड़नी होगी। सपा, बसपा, कांग्रेस ने मुस्लिमों का हित नहीं किया है।
अकेले शमी ने तो नहीं हरवाया मैच
पाकिस्तान से विश्वकप क्रिकेट मैच में हार के बाद प्रशंसकों के निशाने पर चल रहे गेंदबाज मोहम्मद शमी का बचाव करते हुए कहा कि केवल शमी ने मैच नहीं हरवाया। हमने तो प्रधानमंत्री से कहा था कि पाकिस्तान से क्रिकेट नहीं होनी चाहिए। शमी को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है, यह सब जानते हैं।
मलेरिया की दवा नहीं खरीद सकता पाक
ओवैसी ने पाकिस्तान के मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि क्रिकेट में जीत पर गलत बयानबाजी नहीं करें। पाकिस्तान की औकात मलेरिया की दवा खरीदने तक की नहीं है। हमारे देश में जो भी है, वह हमारे घर का मामला है।
स्थानीय नेताओं का जिक्र भी किया
बिना नाम लिए पूर्व सांसद कादिर राना पर हमलावर हुए। भाजपा के खतौली विधायक विक्रम सैनी का भी जिक्र किया। इसके अलावा मौलाना कलीम सिद्दीकि के पक्ष में खड़े दिखाई दिए।