उन्होंने कहा कि संगठन का ध्यान रखते हुए मजबूती के साथ आगे बढ़ना है। संगठन में आस्तीन के सांप भी हैं, सावधानी से बचते हुए आगे बढ़ना है। किसान सरकार के विरोधी तो हो सकते हैं, लेकिन गद्दार नहीं। संगठन पर शासन-प्रशासन हावी हो गया तो आप लोगों की आस्था टूट जाएगी, बहुत बड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ेगा।
नेताओं के जाल में मत उलझ जाना
भाकियू अध्यक्ष ने कहा कि वर्तमान सरकार के सामने भाकियू ने ही विपक्ष की भूमिका निभाई है। 2024 लोकसभा चुनाव में जो भी सरकार केंद्र की सत्ता में आए, उसे इन विषयों पर गंभीरता से चिंतन करना होगा। आप लोगों को किसी राजनीतिक नेता के जाल में नहीं फंसना है और बहुत ध्यान के साथ इस कठिन समय से निकालना है। किसान संघर्षशील हैं, ना कभी जाति देखी ना कभी मजहब और ना ही पार्टी, जब भी जरूरत पड़ी आप लोगों ने संघर्ष किया है।
यह भी पढ़ें: Election 2024: अखिलेश यादव ने बिजनौर में जनसभा को किया संबोधित, गठबंधन को लेकर दिया ये बयान