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भागवत आत्म दर्शन का साधन है : स्वामी ओमानंद

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शुकतीर्थ शुकदेव आश्रम में कथा महोत्सव के समापन पर बोलते पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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मुजफ्फरनगर, मोरना। पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने कहा कि भागवत मोक्ष ग्रंथ तथा शुकतीर्थ मोक्ष की भूमि है। मोक्ष को प्राप्त करना बहुत दुर्लभ है परंतु शुकतीर्थ और भागवत के सान्निध्य से यह सहजता और सरलता से प्राप्त हो जाता है। संसार में सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है, लेकिन अपने को पहचानना कठिन है।
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तीर्थ नगरी शुकतीर्थ स्थित शुकदेव आश्रम में अखिल भारतीय ललिताम्बा शक्ति समिति के तत्वाधान में चल रही श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव का शनिवार को समापन हो गया। स्वामी ओमानंद ने कहा कि भागवत आत्म दर्शन का साधन है। भागवत भारतीय इतिहास और संस्कृति की साक्षी, रक्षक तथा संरक्षक है। भागवत भारतीय जनमानस में रच बस कर जन जन का कल्याण कर रही है। भागवत भारत की आत्मा और मानसिकता का सिंचन करती है।
कथा व्यास ललिताम्बा पीठाधीश्वर आचार्य जयराम महाराज ने कहा कि भागवत पीठ भागवत जन्मभूमि पावन शुकतीर्थ के जीर्णोद्धारक, तीन सदी के युगदृष्टा, महान संत विभूति, शिक्षा ऋषि 129 वर्षीय स्वामी कल्याणदेव महाराज का मार्गदर्शन और आशीर्वाद मुझे सदैव प्राप्त हुआ। उन्हीं के मार्ग दर्शन से आज पावन शुकतीर्थ में मेरी भागवत कथा की छठी सेवा हो रही है। कथा में दूर दराज क्षेत्रों से सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
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