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अमर उजाला एक्सक्लूसिव : बैक डेट के स्टांप की बिक्री से जिले में बड़ा खेल

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मुजफ्फरनगर। जिले में बैक डेट के स्टांप की बिक्री का बड़ा खेल चल रहा है। इन स्टांप के सहारे फर्जी इकरार नामों, वसीयत और बैनामों का बड़ा षड़यंत्र हो रहा है। आम आदमी को उलझाकर बाद में उसे ब्लैकमेल किया जाता है। जानसठ तहसील का ऐसा ही एक मामला सामने आया है। अफसरों ने अपने आपको सुरक्षित करने के लिए आनन-फानन में जमा रिकार्ड में भाजपा के पूर्व सांसद सोहनवीर सिंह के स्टांप के स्थान पर फर्जी स्टांप रिकार्ड में चढ़ा दिया।
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जानसठ तहसील के गांव टंडेढा निवासी सुभाषचंद शर्मा के नाम पर 50-50 रुपये के दो स्टांप खरीदकर उनकी जमीन का फर्जी इकरारनाम तब तैयार किया गया, जब पीड़ित पक्ष ने अपनी जमीन बेच दी। सुभाषचंद शर्मा ने जुलाई माह में जमीन बेची और जब दाखिल खारिज के लिए तहसील में गए तो विजयकांत शर्मा नाम के व्यक्ति ने यह कहते हुए शिकायत की कि उसके नाम जमीन का मार्च माह का इकरारनामा है। सुभाषचंद शर्मा के पुत्र नितिन शर्मा का कहना है कि उनके पिता ने कोई इकरारनामा किया ही नहीं है। मेरे पिता अंग्रेजी में हस्ताक्षर करते है और इकरारनामे पर हिंदी में किए गए है। पूरी तरह फर्जी इकरारनाम तैयार किया गया।
आरटीआई में मिली जानकारी से खुली पोल
सूचना के अधिकार में उप निबंधक जानसठ से पूछा कि इकरारनामा के लिए किस वेंडर से स्टांप खरीदा गया और कब खरीदा। इसमें जानकारी मिली कि वेंडर संजीव गर्ग से स्टांप लिया गया। सूचना के अधिकार में ही सहायक निबंधन के कार्यालय में रिकार्ड रजिस्टर देखा गया तो उसके स्टांप खरीद का रिकार्ड नहीं मिला। 23 सितंबर को रिकार्ड देखा गया और 25 सितंबर को सूचना दी गई कि रिकार्ड मिला है। नितिन शर्मा का कहना है कि पूर्व सांसद सोहनवीर सिंह ने 50-50 रुपये के दो स्टांप खरीदे थे, उनके नाम के ऊपर उसके पिता का नाम स्टांप खरीददारी में लिख दिया गया। यहां भी विभाग के अधिकारी बच नहीं पा रहे हैं। क्योकि स्टांप की जो सीरीज थी 709-710 की थी और हमारे नाम से लिए गए स्टांप की सीरीज 329-330 है। इस रिकार्ड की कॉपी भी उसने ले ली है। पूरा रिकार्ड उसने अफसरों के सामने रखा है, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। उसने पीएम और सीएम के पोर्टल पर शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई है। डीएम और एसएसपी को सबूत के साथ रजिस्ट्री कर दी है।
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31 मार्च को ट्रेजरी में जमा हो जाता है रिकार्ड
स्टांप वेंडर जो भी स्टांप बिक्री करते हैं, रजिस्टर में इसका पूरा रिकार्ड होता है। रिकार्ड सहित यह रजिस्टर 31 मार्च को एडीएम वित्त के यहां जमा हो जाता है। यहां से रिकार्ड रूम में चला जाता है। रिकार्ड रूम से रजिस्टर निकाले जाने के बाद नाम चढ़ाया गया है। मामले की जांच हो जाए तो इसमें कई नपेंगे।
हमने अपने सामने रजिस्टर दिखाया था: पुनीत
सहायक निबंधन रजिस्ट्रार पुनीत कुमार का कहना है कि शिकायतकर्ता को उन्होंने रिकार्ड का रजिस्टर अपने सामने दिखाया था। शायद उन्हें तिथि की जानकारी नहीं थी, बाद में स्टांप रिकार्ड में मिला है। स्टांप की बिगड़ी सीरीज और पूर्व सांसद के नाम के ऊपर ओवर राईटिंग का वह कोई जवाब नहीं दे सके।
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