मुरादाबाद। अमरोहा जनपद के करीब तीन साल पुराने चर्चित शीशपाल हत्याकांड की जांच के लिए एसआईटी (विशेष जांच दल) का गठन किया गया। एसएसपी मुरादाबाद पवन कुमार के नेतृत्व में बनाई गई टीम में एसपी अपराध/यातायात और सीओ कोतवाली को भी शामिल किया गया है। हत्या और हादसे के बीच उलझे इस केस का सच सामने लाने के लिए टीम को एक माह का वक्त दिया गया है। टीम घटनास्थल का निरीक्षण, वादी, प्रतिवादी और गवाहों व ग्रामीणों के बयान दर्ज करने के अलावा अन्य पहलुओं पर जांच करने के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी।
अमरोहा देहात थानाक्षेत्र के मेहम्दी की मढ़ैया निवासी संजीव कुमार की तहरीर पर नौ जून 2018 को पड़ोसी गांव दुर्गपुर निवासी गजेंद्र, भगवान सिंह और कपिल के खिलाफ हत्या (302) और सबूत मिटाना (201) और एससी-एसटी एक्ट में केस दर्ज कराया था। इसमें संजीव ने पुलिस को बताया था कि आरोपी उसके पिता को गन्ने के खेत में खाद डलवाने के लिए ले गए थे। वहां आरोपियों ने उनकी ट्रैक्टर से कुचल कर हत्या कर दी थी। इस मामले में पुलिस ने दो आरोपी भगवान सिंह और कपिल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, जबकि तीसरा आरोपी गजेंद्र फरार है। घटना के ढाई माह बाद केस की जांच संभल ट्रांसफर कर दी गई थी। अब तीसरे आरोपी गजेंद्र की ओर से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में प्रार्थना पत्र दिया गया है कि शीशपाल की मौत हादसे में हुई थी। हम लोगों को गलत फंसाया गया है। आयोग के आदेश पर डीआईजी शलभ माथुर ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया है। दल का नेतृत्व एसएसपी पवन कुमार करेंगे। इसके अलावा एसपी यातायात/अपराध अशोक कुमार सिंह व सीओ कोतवाली इंदू सिद्घार्थ टीम में शामिल हैं। टीम को एक माह में जांच रिपोर्ट तैयार करनी है।
यह घटना अमरोहा जनपद में छह जून 2018 की है। नौ जून को रिपोर्ट दर्ज हुई थी। इस मामले में दो आरोपी जेल मेें बंद हैं। तीसरा आरोपी फरार है। आयोग के आदेश पर मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। इसमें एसएसपी मुरादाबाद पवन कुमार, एसपी यातायात अशोक कुमार सिंह और सीओ कोतवाली इंदू सिद्घार्थ हैं।
शलभ माथुर, डीआईजी मुरादाबाद
केस कोर्ट में विचाराधीन, दो आरोपियों के खिलाफ लग चुकी है चार्जशीट
अमरोहा के चर्चित हत्याकांड की जांच करने के बाद पुलिस भगवान सिंह और कपिल के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर चुकी है। जिसकी सुनवाई अमरोहा स्थित स्पेशल न्यायाधीश एससीएसटी एक्ट की अदालत में विचाराधीन है।
28 अगस्त 2018 को अमरोहा से संभल ट्रांसफर की गई थी जांच
वादी पक्ष की ओर से इस मामले में अमरोहा पुलिस पर आरोपियों से हमसाज होने के आरोप लगाकर जांच किसी दूसरे जनपद से कराने की मांग की गई थी। तत्कालीन आईजी के आदेश पर जांच अमरोहा से संभल जनपद ट्रांसफर की गई थी। वर्तमान में सीओ सिटी संभल केस की जांच कर रहे हैं।
मुरादाबाद के अस्पताल में मिला था शव, अज्ञात में भरा गया था पंचनामा
मेहम्दी की मढ़ैया निवासी शीशपाल मजदूरी करता था। वह छह जून 2018 को पड़ोसी गांव दुर्गपुर निवासी गजेंद्र, भगवान सिंह और कपिल के गन्ने के खेत में खाद डालने गया था। इसके बाद वह नहीं लौटा था। शाम तक शीशपाल घर नहीं लौटा तो उसकी तलाश की गई थी, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। तीन दिन बाद अमरोहा की रजबपुर थाने की पुलिस की ओर से परिवार को जानकारी दी थी कि एक व्यक्ति घायल अवस्था में पड़ा मिला है। घायल को मुरादाबाद के अस्पताल भेजा गया है। इस तरह करीब 72 घंटे बाद परिजनों को शीशपाल का शव मुरादाबाद के पोस्टमार्टम हाउस पर मिला था, लेकिन तब तक पुलिस अज्ञात में पंचनामा भर चुकी थी।
हाईवे जाम करने के बाद दर्ज किया गया था हत्या का केस
मुरादाबाद में पोस्टमार्टम होने के बाद शीशपाल का शव गांव ले जाया गया तो परिजनों ने अमरोहा-अतरासी मार्ग पर शव रखकर जाम लगा दिया था। पुलिस ने शव हटाने की कोशिश की तो खूब हंगामा हुआ था। इसके बाद ही पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ हत्या और सबूत मिटाने व एससीएसटी एक्ट में केस दर्ज किया था।
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