मुरादाबाद। शेरकोट बैराज से छोड़े गए 40 हजार क्यूसेक पानी के कारण जिले में रामगंगा नदी का जलस्तर बढ़ गया है। बृहस्पतिवार की शाम को जलस्तर खतरे के निशान से केवल एक मीटर दूर रह गया है। तटवर्ती गांव के लोगों को अलर्ट किया गया है। उधर गांगन नदी में भी पानी बढ़ा है।
जिले में कई दिनों से बारिश हो रही है। उत्तरांखड में भी लगातार बारिश का क्रम चल रहा है । लगातार बारिश से नदियों में पानी लगातार बढ़ रहा है। इसी के चलते खो नदी का जलस्तर बढ़ गया था। बिजनौर जिले के शेरकोट बैराज पर स्टोर किया गया खो नदी का 40 हजार क्यूसेक पानी बुधवार को रामंगगा नदी में छोड़ा गया ये पानी बृहस्पतिवार को जिले में पहुंचा तो रामंगा नदी का जलस्तर बढ़ गया है। बाढ़ खंड के कंट्रोल रूम से मिली जानकारी के अनुसार बृहस्पतिवार शाम को रामंगा नदी का जलस्तर 189.650 मीटर पहुंच गया हैए जबकि नदी का खतरे का निशान समुद्र तल से 190.60 मीटर पर है जो खतरे के निशान से करीब एक मीटर दूर है।
उधर गांगन नदी का जलस्तर अभी खतरे के निशान से तीन मीटर दूर है। बृहस्पतिवार को ये 189.150 मीटर पर था जबकि इस नदी का खतरे का निशान समुद्र तल से 192 मीटर पर है। हालांकि कुदंरकी क्षेत्र में गांगन नदी का पानी खेतों में घुसने से किसानों को नुकसान हुआ है। उन्हें काफी परेशानी हुई है लेकिन बाढ़ खंड के अधिकारियों ने इसकी दूसरी वजह बताई है। बाढ़ खंड के एसडीओ सुभाष कुमार ने बताया कि कुंदरकी के खादर क्षेत्र में रामंगा और गांगन नदी आपस में मिलती है।
गांगन में अधिक पानी नहीं है। वहां पर रामगंगा का पानी गांगन में गया होगा और गागन नदी के पानी बैक हुआ होगा इस वजह से गांगन का पानी खेेत आदि में गया होगा। बाढ़ खंड के एसडीओ का कहना है कि कालागढ़ डेम अभी पूरा नहीं भरा है वह पूरा भरने से 20 मीटर दूर है ऐसे में वहां से भी रामंगगा में पानी छोड़ने की फिलहाल कोई उम्मीद नहीं है , इसलिए जिले में फिलहाल रामंगगा या गांगन किसी भी नदी में कोई खतरा नहीं है। फिर भी तटवती क्षेत्र के लोग अलर्ट रहें।